मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल के लिए बनेगी कमेटी
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल लाने के लिए एक कमेटी बनाए जाने की संभावना है। इस कमेटी की चेयरमैन पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई हो सकती हैं।
इस कमेटी में 5-6 सदस्य शामिल होंगे, जिनमें हाईकोर्ट के पूर्व जज, रिटायर आईएएस अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता, विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि और वरिष्ठ वकील शामिल होंगे।
राज्य सरकार ने गुजरात और उत्तराखंड से जानकारी ली है, जहां यूसीसी बिल रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में तैयार किया गया था। इसी आधार पर मध्य प्रदेश सरकार भी उन्हें यह जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में शासन स्तर पर जल्द ही बैठक प्रस्तावित है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के कई निर्णयों की कीमत देश ने चुकाई है, जिन्हें अब सुधारा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ रहे हैं। 1951 के “एक देश, एक निशान, एक प्रधान” के विचार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में धर्म, जाति या सामाजिक भेदभाव के बिना सभी के लिए कानून समान होना चाहिए।
खेल एवं युवक कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए कानून में एकरूपता जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानून में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए और कांग्रेस पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाया।
रंजना प्रकाश देसाई ही क्यों?
गुजरात में मार्च 2025 में रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी में रिटायर्ड आईएएस सी.एल. मीणा, वरिष्ठ अधिवक्ता आर.सी. कोडेकर, पूर्व कुलपति डॉ. दक्षेश ठाकर और सामाजिक कार्यकर्ता गीता श्रॉफ शामिल थे।
इस कमेटी ने एक वर्ष के भीतर कई बैठकों, जनसुनवाई और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद बिल तैयार किया, जिसे बिना किसी बदलाव के पारित कर दिया गया। मध्य प्रदेश भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाने की तैयारी में है।