एमआरयूटी योजना में देरी: मध्यप्रदेश के 15 जिले पिछड़े
मध्यप्रदेश में एमआरयूटी योजना के तहत शुद्ध पेयजल और सीवरेज सिस्टम सुधार के कार्य में देरी देखने को मिली है।
18 मई तक, लगभग 15 जिले केवल 55% तक ही कार्य पूरा कर पाए हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे महानगर भी पीछे हैं, जहां कार्य की प्रगति 70% से अधिक नहीं हुई है।
यह योजना 1 अक्टूबर 2021 से शुरू हुई थी और इसमें लगभग 5000 करोड़ रुपये के कार्य शामिल हैं, जिन्हें पांच वर्षों में पूरा करना था।
देरी के कारण नगरीय प्रशासन आयुक्त द्वारा मासिक समीक्षा की जा रही है और लापरवाही करने वाली ठेका कंपनियों पर कार्रवाई की जा रही है।
पिछले तीन महीनों में 20 से अधिक ठेका कंपनियों को नोटिस भेजा गया और कुछ को ब्लैकलिस्ट किया गया है। साथ ही, 40 से अधिक इंजीनियरों पर निलंबन या कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
वहीं कुछ जिले बेहतर प्रगति कर रहे हैं, जहां 75% से 85% तक कार्य पूरा हो चुका है।
दूषित पेयजल प्रबंधन के लिए एसओपी भी जारी की गई है और परियोजनाओं की समीक्षा ई-नगर पालिका पोर्टल के डीएलआरएमसी टैब पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकांश परियोजनाएं महापौर परिषद (एमआईसी) में लंबित हैं, जिनमें 1000 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य अनुमोदन का इंतजार कर रहे हैं।
भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, बुरहानपुर और सागर में पुरानी पेयजल और ड्रेनेज लाइनों की समस्याएं हैं। टेंडर संबंधित विवादों के कारण एमआईसी में सहमति नहीं बन पाने से शहरों का विकास प्रभावित हो रहा है।



