भारत में खाद्य प्रसंस्करण बाजार में वृद्धि - डॉ. जयंतिलाल भंडारी


बदलती जीवनशैली के कारण खाद्य प्रसंस्करण बाजार में वृद्धि

लेखक: डॉ. जयंतिलाल भंडारी

वर्तमान में भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का बाजार आकार तेज़ी से बढ़ रहा है। इसका कारण है लोगों की बढ़ती आय, शहरीकरण के कारण बदलती जीवनशैली और खाने की आदतों में बड़ा बदलाव। डेलॉयट और फिक्की द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000-01 में परिवारों के खाद्य बजट का 40% हिस्सा अनाज और दालों पर खर्च होता था, जो 2023-24 में घटकर केवल 14% रह गया है।

लगभग सभी आय वर्गों की खाद्य आदतों में बदलाव आया है। शहरी संपन्न वर्ग अब अपने मासिक खाद्य बजट का लगभग 50% पैकेज्ड फूड, बाहर खाने और होम डिलीवरी पर खर्च कर रहा है। ग्रामीण भारत में भी यही रुझान देखा जा रहा है, जहां अब अनाज की जगह पेय पदार्थ और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की खपत बढ़ रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, जब कृषि उपज को तैयार खाद्य उत्पाद में बदला जाता है, तो उसकी मूल्यवृद्धि लगभग 30% होती है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र 2023 में $307 अरब से बढ़कर 2030 तक $700 अरब हो जाएगा। साथ ही, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण निर्यात भी 2030 तक $125 अरब तक पहुँचने की संभावना है।

भारत नवाचार, स्थिरता और सुरक्षा के वैश्विक मानक तय कर रहा है। पिछले 10 वर्षों में सरकार ने अनेक सुधार किए हैं जैसे: 100% एफडीआई की अनुमति, प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, सूक्ष्म खाद्य उद्योगों का औपचारिककरण, पीएलआई योजना, आदि।

यह क्षेत्र डेयरी, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण, अनाज, मांस-मछली और पोल्ट्री प्रसंस्करण, तथा उपभोक्ता पैकेज्ड खाद्य और पेय जैसे 5 प्रमुख क्षेत्रों में बंटा है। सरकार ने प्रत्येक क्षेत्र की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए हैं।

2020 में शुरू की गई किसान रेल और कृषि अवसंरचना निधि के तहत ₹1 लाख करोड़ की वित्तीय सहायता से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को लाभ मिल रहा है। इसके अलावा, एपीडा (APEDA) द्वारा कृषि क्लस्टर और उत्पाद-विशिष्ट क्लस्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है।

हालांकि, भारत में कुल खाद्य उत्पादन का केवल 10% से भी कम प्रसंस्कृत होता है। सब्जियों का केवल 2.7%, फलों का 4.5%, मत्स्य का 15.4%, और दूध का 21.1% हिस्सा ही प्रसंस्कृत होता है।

खाद्यान्न भंडारण की कमी एक बड़ी बाधा है। लगभग 12 से 14% खाद्यान्न खराब हो जाता है क्योंकि भंडारण क्षमता केवल 1450 लाख टन है, जो उत्पादन से काफी कम है।

16 जुलाई को स्वीकृत ‘धान-धान्य और समृद्धि योजना’ से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह योजना कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्यान्न भंडारण सुधारने और फसल अपव्यय को कम करने में मदद करेगी। इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी और भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

लेखक: डॉ. जयंतिलाल भंडारी

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