सामान्य ज्ञान प्रश्न उत्तर – 1 मई 2026
प्रश्न 1:
होमस्टे पर्यटन भारत में स्थानीय विकास, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया मॉडल बन रहा है। विवेचना कीजिए।
उत्तर:
पर्यटन क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में एक उभरती हुई शक्ति है। हाल के वर्षों में होमस्टे पर्यटन ने पारम्परिक होटल-आधारित पर्यटन की जगह लेते हुए स्थानीय समुदायों को सीधे तौर पर विकास की धारा से जोड़ा है। यह मॉडल ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य में योगदान देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रतीक बन रहा है।
होमस्टे पर्यटन का महत्व:
- पर्यटक सीधे ग्रामीण परिवारों के साथ ठहरते हैं, जिससे स्थानीय उत्पादों, भोजन और सेवाओं की माँग बढ़ती है।
- महिलाओं को गृह-आधारित उद्यम चलाने के अवसर मिलते हैं।
- लोककला, हस्तशिल्प, परम्पराएँ और पारंपरिक व्यंजन पुनर्जीवित होते हैं।
- बड़े होटलों की तुलना में कम संसाधन खपत और पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है।
नीतिगत पहलें:
- नीति आयोग की ग्रामीण होमस्टे नीति 2025 में स्थान, मेजबान, आवास, स्वच्छता और स्थानीय व्यंजन को 5 स्तम्भों के रूप में परिभाषित किया गया है।
- मेक माई ट्रिप और बुकिंग डॉट कॉम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्रामीण होमस्टे को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है।
- उत्तराखंड में DDUGAY योजना के तहत महिला संचालित होमस्टे को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
- केरल में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म पहल द्वारा गाँव स्तर पर प्रशिक्षण और प्रमाणन किया जा रहा है।
प्रमुख चुनौतियाँ:
- अस्पष्ट नियामक ढाँचा और लाइसेंसिंग की जटिलता।
- डिजिटल साक्षरता और विपणन कौशल की कमी।
- आधारभूत ढांचे की सीमाएँ।
- मौसमी पर्यटन पर निर्भरता और अपर्याप्त प्रशिक्षण।
सम्भावनाएँ और आगे का मार्ग:
- डिजिटल ब्रांडिंग और स्थानीय विपणन को सशक्त बनाना।
- सरकारी और निजी सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना।
- “एक जिला, एक होमस्टे क्लस्टर” मॉडल को बढ़ावा देना।
- पर्यटन नीति को ग्राम विकास, कौशल और संस्कृति मंत्रालयों से जोड़ना।
अतः होमस्टे पर्यटन केवल ठहरने का विकल्प नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है। उचित नीति, प्रशिक्षण और डिजिटल नवाचार के साथ यह भारत को 2047 तक एक समावेशी, सतत् और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पर्यटन गंतव्य बना सकता है।
प्रश्न 2:
मानव शरीर में विटामिन B12 की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। इसकी कमी से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं तथा उनके निवारण उपायों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
विटामिन B12 (कोबालामिन) एक जल में घुलनशील आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो मानव शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, तंत्रिका तंत्र के सुचारू कार्य और DNA संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानव शरीर इसे स्वयं नहीं बना सकता, इसलिए यह भोजन से प्राप्त किया जाता है।
विटामिन B12 की भूमिका:
- लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता कर एनीमिया से बचाव करता है।
- माइलिन शीथ के निर्माण द्वारा तंत्रिका तंत्र की सुरक्षा करता है।
- DNA संश्लेषण, कोशिका विभाजन और विकास में आवश्यक है।
- प्रोटीन और वसा के चयापचय में सहायक है।
कमी से उत्पन्न रोग:
- मेगालोब्लास्टिक एनीमिया।
- तंत्रिका विकार जैसे स्मृति ह्रास, सुन्नपन और अवसाद।
- थकान और मानसिक भ्रम।
- गर्भावस्था में भ्रूण विकास संबंधी जटिलताएँ।
निवारण उपाय:
- संतुलित और विविध आहार का सेवन।
- फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों का उपयोग।
- उच्च जोखिम समूहों (वृद्ध, गर्भवती महिलाएँ) में सप्लीमेंट्स का उपयोग।
- राष्ट्रीय पोषण मिशन के अंतर्गत जागरूकता अभियान चलाना।
अतः विटामिन B12 की पर्याप्त मात्रा स्वस्थ रक्त निर्माण, मानसिक संतुलन और तंत्रिका स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। जागरूकता, पोषण नीतियों और फोर्टिफिकेशन कार्यक्रमों के माध्यम से इसकी कमी को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।



