भारत और यूएई ऊर्जा क्षेत्र में करेंगे दो अहम समझौते


ऊर्जा क्षेत्र में दो अहम समझौता करेंगे भारत और यूएई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 मई को होने वाली यूएई यात्रा भले ही संक्षिप्त हो, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के लिहाज से यह काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस दौरान भारत और यूएई के बीच एलपीजी आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर होने की तैयारी है।

ओपेक से बाहर आने के बाद भारत पहला ऊर्जा साझेदार

हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक से बाहर निकलने का फैसला किया है। इसके बाद भारत यूएई के साथ ऊर्जा क्षेत्र में नया समझौता करने वाला पहला देश बनेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार यूरोपीय देशों — नीदरलैंड, स्वीडन, नार्वे और इटली — के दौरे से पहले यूएई जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद से होगी।

भारत और यूएई के बीच मजबूत ऊर्जा साझेदारी

भारत और यूएई के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से ही मजबूत साझेदारी मौजूद है।

  • यूएई भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला चौथा सबसे बड़ा देश है।
  • यह भारत की कुल तेल जरूरत का लगभग 11 प्रतिशत पूरा करता है।
  • यूएई भारत को सबसे अधिक एलपीजी (रसोई गैस) सप्लाई करने वाला देश भी है।
  • यह भारत की लगभग 40 प्रतिशत एलपीजी मांग को पूरा करता है।

पहले हुआ था बड़ा एलएनजी समझौता

इसी वर्ष जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति की नई दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 3 अरब डॉलर का 10 वर्षीय एलएनजी सप्लाई समझौता हुआ था।

इस समझौते के बाद भारत यूएई का सबसे बड़ा एलएनजी खरीदार बन गया है।

तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने पर चर्चा

सूत्रों के अनुसार, यूएई भारत में अतिरिक्त तेल भंडारण सुविधाओं की संभावनाओं को तलाशने में रुचि रखता है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

इससे पहले वर्ष 2017-18 में भारत और यूएई के बीच रणनीतिक कच्चे तेल भंडारण समझौता हुआ था।

इस समझौते के तहत अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड के बीच मंगलौर भंडारण सुविधा में 58.6 लाख बैरल तेल संग्रहित करने का करार हुआ था।

हाल ही में दोनों देशों के बीच इस समझौते का विस्तार करने और अतिरिक्त भंडारण क्षमता बढ़ाने को लेकर चर्चा भी हुई है।

भारत-यूएई संबंध नए स्तर पर

पिछले कुछ वर्षों में भारत और यूएई के संबंध अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच गए हैं।

दोनों देशों के बीच निम्न क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है:

  • व्यापार
  • निवेश
  • रक्षा
  • प्रौद्योगिकी
  • ऊर्जा संक्रमण

दोनों देशों ने वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

बदलते भू-राजनीतिक हालात में नई संभावनाएं

खाड़ी क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियां भारत और यूएई की रणनीतिक साझेदारी के लिए नई संभावनाएं खोल रही हैं।

विशेष रूप से सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ती दूरी तथा क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच भारत-यूएई संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ती दिखाई दे रही हैं।




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