कोयले से गैस बनाने वाली ₹37,500 करोड़ की योजना को मंजूरी
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट के खतरे से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ₹37,500 करोड़ की कोल गैसीफिकेशन योजना को मंजूरी दी गई।
यह फैसला भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा संकट का प्रभाव
पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है, जिससे विमानन सहित कई क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।
भारत वर्तमान में बड़ी मात्रा में ऊर्जा और रासायनिक उत्पादों का आयात करता है:
- 50% से अधिक एलएनजी
- लगभग 20% यूरिया
- लगभग 100% अमोनिया
- 80–90% मेथनॉल
वित्त वर्ष 2024-25 में इन उत्पादों के आयात पर लगभग ₹2.77 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए।
कोयला गैसीफिकेशन को बढ़ावा
भारत में कोयला गैसीफिकेशन की योजना पिछले ढाई दशकों से चर्चा में रही है, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है।
अब सरकार इसे एक रणनीतिक आवश्यकता मान रही है।
राष्ट्रीय लक्ष्य और योजना का विवरण
इस योजना के तहत लगभग 7.5 करोड़ टन कोयला या लिग्नाइट के गैसीफिकेशन का लक्ष्य रखा गया है। यह 2030 तक 10 करोड़ टन गैसीफिकेशन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस योजना के तहत:
- प्लांट और मशीनरी लागत का अधिकतम 20% वित्तीय प्रोत्साहन
- प्रोत्साहन चार समान किस्तों में परियोजना चरणों के अनुसार
- कुल प्रोत्साहन राशि ₹5,000 करोड़ से ₹12,000 करोड़ तक



