देश में जरूरत से तीन गुना अधिक खाद्यान्न भंडार
भारत में इस समय खाद्यान्न की उपलब्धता बेहद मजबूत स्थिति में है। केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल का कुल भंडार जरूरत से लगभग तीन गुना तक पहुंच गया है, जो खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बड़ी उपलब्धि है।
भारतीय खाद्य निगम (FCI) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के पहले सप्ताह तक देश के पास करीब 6.04 करोड़ टन खाद्यान्न उपलब्ध है, जबकि न्यूनतम बफर स्टॉक 2.1 करोड़ टन निर्धारित है।
इससे स्पष्ट है कि भारत न केवल खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर है, बल्कि अब अधिशेष उत्पादन की स्थिति में पहुंच चुका है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नई फसल की खरीद भी जारी है, जिससे खाद्य सुरक्षा और मजबूत होगी।
हालांकि इतनी अधिक मात्रा में खाद्यान्न होने से सरकार के सामने भंडारण और प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ गई है। FCI के अनुसार, गेहूं का स्टॉक लगभग 2.18 करोड़ टन और चावल का स्टॉक 3.86 करोड़ टन है, जो तय मानकों से काफी अधिक है।
खास बात यह है कि गेहूं के भंडार में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बेहतर उत्पादन और सरकारी खरीद को दर्शाती है। वहीं, चावल का स्टॉक भी रिकॉर्ड स्तर के करीब है।
यह स्थिति कई मायनों में राहत देने वाली है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी आपात स्थिति या आपूर्ति बाधा के दौरान खाद्यान्न की कमी नहीं होगी और महंगाई को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलेगी।
सरकार जरूरत पड़ने पर ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत अनाज जारी कर कीमतों को स्थिर रख सकती है।
मजबूत भंडार के कारण सरकार अब नीतिगत फैसलों में अधिक लचीलापन दिखा रही है। हाल ही में गेहूं निर्यात पर आंशिक छूट देकर 50 लाख टन तक निर्यात की अनुमति दी गई है।
इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में भारत की उपस्थिति बनाए रखना, अधिशेष का बेहतर उपयोग करना और भंडारण की चुनौतियों को कम करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त स्टॉक होने से किसानों के हित सुरक्षित रहते हैं, क्योंकि सरकार MSP पर खरीद जारी रखती है। इससे बाजार में कीमत गिरने का खतरा कम होता है और किसानों को उचित मूल्य मिलता है।