भारत बनेगा दुनिया का बड़ा रक्षा निर्यातक, स्वदेशी हथियारों की वैश्विक मांग बढ़ी


भारत बनेगा दुनिया का बड़ा रक्षा निर्यातक, स्वदेशी हथियारों की वैश्विक मांग बढ़ी

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, लॉयटरिंग म्युनिशन और नेत्र निगरानी प्रणाली जैसे स्वदेशी रक्षा उपकरणों के सफल उपयोग के बाद विश्वभर में भारतीय हथियारों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कई देशों ने भारतीय रक्षा प्रणालियों को खरीदने में रुचि दिखाई है, जबकि कुछ देशों के साथ हजारों करोड़ रुपये के रक्षा सौदे भी संपन्न हो चुके हैं। वर्तमान में ऐसे रक्षा निर्यात समझौतों का कुल मूल्य 21,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62 प्रतिशत अधिक है।

ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल से बढ़ा निर्यात

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लिए फिलीपींस, वियतनाम और दो अन्य देशों के साथ लगभग 12,500 करोड़ रुपये के निर्यात समझौते हो चुके हैं।

इसके अलावा इंडोनेशिया के साथ लगभग 3,600 करोड़ रुपये का रक्षा सौदा अंतिम स्वीकृति के चरण में है।

वहीं आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली के लिए अर्मेनिया के साथ 6,100 करोड़ रुपये का अनुबंध पहले ही किया जा चुका है, जिससे वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।

100 से अधिक देशों को रक्षा निर्यात

भारत वर्तमान में 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण, सैन्य प्रणाली और कलपुर्जों का निर्यात कर रहा है। प्रमुख निर्यात गंतव्यों में अमेरिका, फ्रांस, अर्मेनिया तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश शामिल हैं।

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा रक्षा निर्यात बाजार बनकर उभरा है, जहां लगभग 2.8 अरब डॉलर मूल्य के रक्षा उपकरण और कलपुर्जे निर्यात किए जाते हैं। इनका उपयोग बोइंग और लॉकहीड मार्टिन जैसी वैश्विक रक्षा कंपनियों द्वारा किया जाता है।

जहां अमेरिका मुख्य रूप से रक्षा उपकरणों के पुर्जे और उप-प्रणालियां खरीदता है, वहीं अर्मेनिया जैसे देश भारत से पूर्ण हथियार प्रणालियां खरीद रहे हैं।

2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य

भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2029-30 तक रक्षा निर्यात को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

वर्ष 2016-17 में भारत का रक्षा निर्यात केवल 1,522 करोड़ रुपये था। एक दशक से भी कम समय में इसमें 25 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय रक्षा उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय रक्षा प्रणालियों को जो वैश्विक पहचान और भरोसा मिला है, उससे आने वाले वर्षों में रक्षा निर्यात को और गति मिलने की संभावना है। इससे भारत वैश्विक रक्षा उद्योग में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।




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