इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन मेट्रो इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से 6 लाख रोजगार मिलेंगे
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमि पूजन 3 मई को मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया गया। यह परियोजना पहले चरण में 20 किमी से शुरू होकर आगे चलकर 100 किमी लंबे मेट्रो इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट रीजन के रूप में विकसित होगी।
इस कॉरिडोर से इंदौर को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अहमदाबाद कॉरिडोर से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इस परियोजना में लगभग ₹1 लाख करोड़ का निवेश होने का अनुमान है और करीब 6 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर प्रदेश के आर्थिक सशक्तिकरण की रीढ़ बनेगा और इंदौर में निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलेगा। इसे मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास का “ग्रोथ स्पाइन” बताया गया।
विकास की प्रमुख योजनाएं
पहले चरण में इंडस्ट्रियल और कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ डेटा सेंटर, ग्रीन इंडस्ट्री और नॉलेज बेस्ड सेक्टर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा 3300 एकड़ में एक हाईटेक अर्बन सिटी विकसित की जाएगी, जिसमें आधुनिक परिवहन व्यवस्था होगी।
पांच जिलों का औद्योगिक क्लस्टर
यह कॉरिडोर पहले 20 किमी तक विकसित होगा और बाद में 100 किमी तक विस्तारित किया जाएगा। इससे इंदौर को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव मिलेगा।
इंदौर, उज्जैन, धार, देवास और शाजापुर मिलकर एक बड़ा औद्योगिक क्लस्टर बनाएंगे, जिसमें ग्रीन इंडस्ट्री, फिनटेक और हाईटेक सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
किसानों की भागीदारी
इस परियोजना में लैंड पुलिंग मॉडल अपनाया गया है, जिसमें किसानों को उनकी जमीन के बदले 60% विकसित जमीन वापस दी जाएगी। सरकार ने 650 करोड़ रुपये के विकसित प्लॉट किसानों को सौंपे हैं।
17 गांवों के किसान इस योजना से सीधे जुड़ेंगे। इस मॉडल के तहत किसान केवल मुआवजा पाने वाले नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक गतिविधियों में भागीदार भी बनेंगे।