योजना को 5 साल और बढ़ाया, अब विद्यार्थियों को नकद नहीं बल्कि सीधे साइकिल मिलेगी
मध्यप्रदेश में दो दशक पहले शुरू की गई नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना को अगले 5 वर्षों के लिए जारी रखने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना के लिए 990 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जो वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी।
इस वर्ष लगभग 210 करोड़ रुपये साइकिल खरीद पर खर्च किए जाएंगे, जबकि पिछले वर्ष 195 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस प्रकार इस वर्ष लगभग 7.69% अधिक बजट खर्च किया जाएगा।
अब इस योजना के तहत विद्यार्थियों को नकद राशि नहीं दी जाएगी, बल्कि सेंट्रल परचेजिंग सिस्टम के माध्यम से सीधे साइकिल उपलब्ध कराई जाएगी।
यह योजना 2004-05 में शुरू की गई थी, जिसमें शुरुआत में केवल अनुसूचित जनजाति (ST) की छात्राओं को शामिल किया गया था, जो अपने गांव से बाहर पढ़ने जाती थीं। बाद में इसमें अनुसूचित जाति (SC), पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया।
वर्तमान में एक साइकिल की कीमत लगभग 3500 से 3800 रुपये है। पहले 2021-22 तक राशि सीधे छात्रों के खातों में दी जाती थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से साइकिल की खरीद केंद्रीकृत प्रणाली से की जा रही है।
डाइट केंद्र होंगे अपग्रेड
सरकार ने साइकिल योजना और शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए 2191 करोड़ रुपये भी मंजूर किए हैं, जिनमें से 1200 करोड़ रुपये डाइट संस्थानों के वेतन, संचालन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे।
प्रदेश की 47 डाइट और 7 पीजीबीटी कॉलेजों में नई लैब, कंप्यूटर, इंटरएक्टिव पैनल, स्टाफ, हॉस्टल और क्वार्टर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।