मध्यप्रदेश में पहली बार ओपन जेलों में 10% महिला आरक्षण का प्रस्ताव
नौकरी में मिल रहे महिला आरक्षण के बीच अब मध्यप्रदेश की ओपन जेलों में भी महिला बंदियों को शामिल करने की तैयारी है। जेल मुख्यालय ने 10% महिला आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा है।
यह पहल सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश से पहले शुरू हुई है, जिसमें फरवरी 2026 में राज्यों को ओपन जेलों का दायरा बढ़ाने और महिलाओं को इसमें शामिल करने के आदेश दिए गए थे। डीजी जेल वरुण कपूर ने दिसंबर 2025 में नियमों में संशोधन का प्रस्ताव भेजा।
मध्यप्रदेश में वर्तमान में 8 ओपन जेलें हैं जिनकी कुल क्षमता 138 बंदियों की है। ये जेलें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, सतना, उज्जैन और सागर में स्थित हैं। प्रदेश में लगभग 42,000 बंदी हैं जिनमें करीब 1,600 महिलाएं हैं।
ओपन जेल में प्रवेश के लिए बंदी का अच्छा आचरण, शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। आजीवन कारावास वाले बंदी को 14 वर्ष की सजा पूरी करनी होती है, जबकि अन्य बंदी को दो-तिहाई सजा पूरी करनी होती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए एनएएलएसए द्वारा हाई पावर कमेटी गठित की गई है, जो ओपन जेल व्यवस्था और महिला बंदियों के समावेश की निगरानी करेगी।
ओपन जेल ऐसी व्यवस्था है जहाँ बंदी दिन में काम कर सकते हैं और शाम को वापस लौटते हैं। इसका उद्देश्य अच्छे व्यवहार वाले कैदियों का सामाजिक पुनर्वास करना है।
राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल और झारखंड जैसे राज्यों में पहले से ओपन जेल प्रणाली लागू है, जहाँ महिलाओं के लिए भी प्रावधान मौजूद हैं।
ओपन जेल में बंदी को परिवार के साथ रहने की अनुमति होती है और शुरुआत में सरकार एक महीने का राशन और गैस सिलेंडर प्रदान करती है। बाद में बंदी को अपने खर्च स्वयं उठाने होते हैं।



