स्पेशल-28: मूक-बधिरों को साइन लैंग्वेज से न्याय दिलाने की पहल
देश में पहली बार मूक-बधिरों को साइन लैंग्वेज के माध्यम से न्याय दिलाने की तैयारी है। मप्र हाई कोर्ट ने मूक-बधिरों के लंबित केसों के त्वरित निपटारे के लिए 28 लोगों की स्पेशल टीम बनाई है। इसमें 21 मूक-बधिर और 7 साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट शामिल हैं, जिनमें 9 महिलाएं भी हैं। ये टीम वैवाहिक, पारिवारिक और संपत्ति से जुड़े विवाद अदालत के बाहर सहमति से सुलझाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पहल को मंजूरी दी है।
प्रदेश में 5 स्पेशल मीडिएशन सेंटर
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की पहल पर बनाई गई टीम को जस्टिस विवेक रूसिया मॉनिटर कर रहे हैं। विशेषज्ञ मीडिएटर्स ने 1 अप्रैल से मध्यस्थता शुरू कर दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत 16 मई को जबलपुर आ रहे हैं, जब इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा और सीधी में पांच स्पेशल मीडिएशन सेंटर शुरू होने की संभावना है। 14 से 19 मार्च के बीच इंदौर में टीम ने 40 घंटे की विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।
स्पेशल-28 टीम का विवरण
- इंदौर: 8 सदस्य (6 मूक-बधिर, 2 साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट)
- भोपाल: 4 सदस्य (2 मूक-बधिर, 2 एक्सपर्ट)
- जबलपुर: 4 सदस्य (3 मूक-बधिर, 1 एक्सपर्ट)
"न्याय का वास्तविक रूप तभी साकार होता है, जब वह हर व्यक्ति के लिए सुलभ हो। यह नवाचार बाधाओं को दूर करने की दिशा में अहम कदम है।" – चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा
केस हाइलाइट्स
केस 1: भाई-भाई विवाद सुलझा
शाजापुर में एक मूक-बधिर दंपती का घर में बिजली सप्लाई को लेकर भाई और पिता से विवाद था। स्पेशल-28 सदस्य अतुल राठौर ने साइन लैंग्वेज में मध्यस्थता की। दोनों पक्षों ने सहमति बनाई और भाई-भाई फिर से मेल-मिलाप कर गए।
केस 2: तलाक टला
इंदौर के मूक-बधिर युवक और युवती का 8 महीने से फैमिली कोर्ट में तलाक का मामला था। 8 मई को साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट ज्ञानेंद्र पुरोहित ने मध्यस्थता की। इसके बाद दंपती फिर से साथ रहने पर सहमत हो गए।



