विदेश में पढ़ाई: बढ़ती वीजा रिजेक्शन दर और बदलते रुझान
विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों में 31% कमी
पिछले दो वर्षों में विदेश जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 31% की कमी आई है। इसका मुख्य कारण डॉलर और पाउंड की मजबूती, सख्त वीजा और इमिग्रेशन नीतियां, फंड प्रूफ, पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट और मेडिकल नियम हैं।
अमेरिका में वीजा रिजेक्शन 60% तक
अमेरिका में भारतीय छात्रों के वीजा रिजेक्शन की दर करीब 60% हो गई है, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है।
छात्रों का रुझान नए देशों की ओर
ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और चीन ने पिछले दो वर्षों में अपनी इमिग्रेशन नीतियां सख्त कर दी हैं। इसके चलते छात्र अब दुबई, इटली, जर्मनी, स्पेन, फ्रांस और आयरलैंड जैसे देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इंदौर से दुबई के लिए सीधी उड़ान शुरू होने के बाद मध्य प्रदेश से वहां जाने वाले छात्रों की संख्या में लगभग 40% की वृद्धि हुई है।
एक्सपर्ट की राय
विशेषज्ञ: प्रशांत हेमनानी, फराज वारसी (विदेश शिक्षा एवं वीजा विशेषज्ञ)
अमेरिका
एक बार वीजा रिजेक्ट होने के बाद अगला मौका 8 से 10 महीने बाद मिलता है, जिससे लगभग 30% की कमी आई है। हालांकि, अमेरिकी यूनिवर्सिटी अभी भी प्राथमिकता में हैं।
ब्रिटेन
वर्क वीजा के लिए न्यूनतम वेतन सीमा £26,200 (₹33 लाख) से बढ़ाकर £38,700 (₹49 लाख) कर दी गई है। अब पढ़ाई के बाद काम करने के लिए ₹16 लाख अधिक वार्षिक पैकेज जरूरी है।
कनाडा
वीजा के लिए आवश्यक फंड (रहने-खाने का खर्च) CAD 10,000 (₹7 लाख) से बढ़ाकर CAD 20,635 (₹14 लाख) कर दिया गया है।
ऑस्ट्रेलिया
भारत को इवीडेंस लेवल 2 से बढ़ाकर इवीडेंस लेवल 3 में डाल दिया गया है, जो उच्च जोखिम श्रेणी मानी जाती है। इससे दस्तावेजों की जांच सख्त हो गई है और रिजेक्शन दर में 10% तक वृद्धि हुई है।
चीन, रूस और जॉर्जिया
इन देशों में मेडिकल पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भारत की नेशनल मेडिकल काउंसिल के सख्त नियम भी चुनौती बन गए हैं। पूरी पढ़ाई अंग्रेजी में होना और सभी 19 विषयों में पास होना जरूरी है।
मध्य प्रदेश में वीजा प्रक्रिया की समस्या
राज्य में वीजा से जुड़े मेडिकल सर्टिफिकेट और बायोमेट्रिक सेंटर की कमी के कारण छात्रों को दिल्ली, मुंबई या अहमदाबाद जाना पड़ता है।
भारत में विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या
दूसरी ओर, भारत में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या बढ़ रही है।
- 2022 में 39,000 विदेशी छात्र भारत आए
- वर्तमान में 150 देशों के 72,000 छात्र भारत में पढ़ रहे हैं
‘स्टडी इन इंडिया’ पहल
सरकार 2030 तक हर साल 2 लाख विदेशी छात्रों को भारत लाने का लक्ष्य रख रही है।
हाल ही में 19 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति दी गई है। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भी भारत की 27 यूनिवर्सिटी टॉप-50 में शामिल हैं।