यूएई ओपेक से बाहर, भारत के लिए सस्ते तेल का नया रास्ता खुल रहा है
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और इसके विस्तारित संगठन ओपेक प्लस (जिसमें रूस जैसे देश शामिल हैं) से बाहर निकलने की घोषणा कर दी है। ओपेक और ओपेक प्लस दशकों से कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में समन्वित नीतियों के जरिए प्रभाव डालते रहे हैं।
यूएई ओपेक में तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और उसका इस तरह से बाहर जाना इस संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ हालिया कार्रवाइयों के बाद कच्चे तेल की कीमतें पहले ही बढ़ रही हैं और यूएई के इस फैसले से इनमें और तेजी आने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम का वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। भारत भी अपने प्रमुख रणनीतिक साझेदार यूएई के इस निर्णय पर करीबी नजर बनाए हुए है।
भारत और यूएई के बीच पहले से ही स्थानीय मुद्रा (रुपया और दिरहम) में व्यापार को बढ़ावा देने का समझौता है। अब ओपेक की बाध्यताओं से मुक्त होकर यूएई भारत के साथ अधिक लचीले और दीर्घकालिक तेल समझौते कर सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और लागत में कमी आ सकती है।