केपीओ और बीपीओ  में क्या फर्क है ? करियर की दृष्टि से कौन सा क्षेत्र ज्यादा अच्छा है ? 

बीपीओ यानी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग के अंतर्गत कंपनियाँ अपने उत्पाद और सेवाओं की जानकारी देने हेतु एक अन्य थर्ड पार्टी से करार करती हैं। इसके अन्दर वह थर्ड पार्टी उस कंपनी के बारे में सभी जानकारी कस्टमर केयर सर्विस के अंतर्गत ग्राहकों तक उपलब्ध कराती है। एक बीपीओ को हम किसी कंपनी का बैक-ऑफिस भी कह सकते हैं। यदि कोई कंपनी बाहर के देशों के बीपीओ के माध्यम से अपना काम कराती है तो इसे हम ऑफशोर आउटसोर्सिंग कहते हैं। केपीओ यानी नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग के अंतर्गत हम किसी उत्पाद या सेवा के बारे में नहीं, बल्कि किसी नॉलेज की जानकारी देते हैं। केपीओ किसी कंपनी का सीधा व्यापारिक फायदा तो नहीं करती, लेकिन इससे कंपनी का वैल्यू एडिशन होता है। केपीओ कंपनियाँ अक्सर फाइनेंशियल एनालिसिस,लॉ, इंश्योरेंस, एजुकेशन, कैपिटल मार्केट, बायोटेक्नोलॉजी, डिजाइन एंड एनिमेशन, मार्केटिंग, पब्लिशिंग इत्यादि नॉलेज-बेस्ड एरिया में काम करती हैं। देश की अग्रणी केपीओ कंपनियों में टेकबुक्स, कोपल पार्टनर्स, फस्टसोर्स आदि शामिल हैं। अब जहाँ तक करियर अवसरों की बात है तो इन दोनों क्षेत्रों में काम करने के लिए आपके अन्दर थोड़ी भिन्न प्रतिभाओं का होना आवश्यक है। बीपीओ में वे छात्र बेहतर कर सकते हैं, जिनके पास अच्छी कम्युनिकेशन स्किल और मूल तकनीकी जानकारी हो और वे ग्राहक की बात और माँग को तुरंत समझने की दक्षता रखते हों। वहीं केपीओ में आपके अन्दर तकनीकी और कम्युनिकेशन स्किल के साथ नई सूचना की जानकारी, उसे तुरंत खोज निकालने और उस पर आकलन कर ग्राहक को जानकारी देने की काबिलियत और उस क्षेत्र की मूलभूत जानकारी होनी चाहिए।

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