एआई चैटबॉट से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, 3 राज्यों में इस्तेमाल
भारत में प्रसव के दौरान हर घंटे लगभग दो मातृ मौतें होती हैं। गर्भावस्था के 20 से 30 प्रतिशत मामले हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के होते हैं, लेकिन मातृ मृत्यु के 70 से 80 प्रतिशत मामले इन्हीं से जुड़े होते हैं। समय रहते हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान कर मातृ मृत्यु दर और नवजात शिशु मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस दिशा में तकनीक अहम भूमिका निभा रही है। बेंगलुरु स्थित सामाजिक संस्था अरमान (ARMMAN) ने आईआईएससी बेंगलुरु के आर्टपार्क (ARTPARK) के सहयोग से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए व्हाट्सएप आधारित जेनरेटिव एआई चैटबॉट विकसित किया है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में 12 हजार से अधिक आशा कार्यकर्ता और एएनएम इसका उपयोग कर रही हैं।
98 प्रतिशत यूजर्स का फीडबैक सकारात्मक
इस एआई चैटबॉट का पायलट प्रोजेक्ट दिसंबर 2024 में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ था। पहले तीन महीनों में 100 एएनएम के साथ इसका परीक्षण किया गया। अप्रैल 2025 से इसे उत्तर प्रदेश के पांच जिलों में लागू किया गया। वर्तमान में तीन राज्यों में हजारों स्वास्थ्य कार्यकर्ता इससे लाभान्वित हो रहे हैं।
अरमान की प्रोडक्ट और इनोवेशन डायरेक्टर अमृता महाले के अनुसार, इस चैटबॉट का उपयोग करने वाली 97 प्रतिशत एएनएम ने इसे संतोषजनक बताया, जबकि कुल उपयोगकर्ताओं का 98 प्रतिशत फीडबैक सकारात्मक रहा।
चैटबॉट की ट्रेनिंग कैसे हुई
चैटबॉट को प्रशिक्षित करने के लिए 100-100 सवालों के सेट तैयार किए गए, जिनमें सामान्य और संभावित जोखिम से जुड़े प्रश्न शामिल थे। जैसे—यदि किसी गर्भवती महिला को आयरन की गोली से एलर्जी हो जाए और हीमोग्लोबिन स्तर 6.8 हो, तो क्या वह हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मानी जाएगी।
चैटबॉट को लागू करने से पहले तीन गायनेकोलॉजिस्ट की एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई, जिसने सभी सवाल-जवाब की समीक्षा और मूल्यांकन किया।
रिस्पॉन्स टाइम में आई बड़ी कमी
पहले हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान के लिए एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को डॉक्टरों से संपर्क करना पड़ता था। अब यह चैटबॉट 10 सेकंड में टेक्स्ट और 30 सेकंड से कम समय में ऑडियो उत्तर उपलब्ध करा रहा है।
कई भाषाओं में उपलब्ध होगा चैटबॉट
आर्टपार्क द्वारा विकसित यह चैटबॉट फिलहाल हिंदी, मराठी और तेलुगु भाषाओं में उपलब्ध है। जल्द ही इसे कन्नड़ भाषा में भी लॉन्च किया जाएगा। आर्टपार्क के प्रोजेक्ट वाणी के तहत भविष्य में इसे अन्य भारतीय भाषाओं में भी प्रशिक्षित किया जाएगा।