राष्ट्रहित के लिए आचरणगत परिवर्तन जरूरी: डॉ. मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रहित के लिए परिवार से समाज तक आचरणगत परिवर्तन जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त समाज के निर्माण के लिए सज्जन शक्तियों का परस्पर पूरक बनकर एक दिशा में कार्य करना अनिवार्य है।
सिलीगुड़ी, उत्तर बंगाल में प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समाज से जीवंत संबंध रखने वाले व्यक्तियों के माध्यम से ही चरित्र निर्माण संभव होता है। डॉ. भागवत ने यह भी कहा कि प्रत्येक परिवार को अपनी कुल-परंपराओं, समयानुकूल रीति-रिवाजों तथा देशहित में सहायक आचरणों का नियमित अभ्यास करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि परिवार का अस्तित्व और सुरक्षा समाज पर निर्भर है, इसलिए इस बोध के साथ समाज की समृद्धि के लिए समय और सामर्थ्य के अनुसार योगदान देना आवश्यक है। संघ की शताब्दी पूर्ण होने के अवसर पर पंच परिवर्तन अभियान के तहत पांच आचरणगत परिवर्तनों का संदेश लेकर स्वयंसेवक घर-घर जाएंगे। अगर केवल आचरण के माध्यम से देशहित में योगदान दिया जा सके, तो वही शताब्दी उत्सव की वास्तविक सार्थकता होगी।
संघ के बारे में फैलाई जा रही भ्रांतियों का निराकरण करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि संघ को किसी निश्चित पद्धति या पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे में बांधकर नहीं समझा जा सकता। संघ जैसा संगठन और कोई नहीं है। इसकी स्थापना न तो किसी का विरोध करने के लिए हुई थी और न ही अपने लिए कुछ प्राप्त करने के उद्देश्य से।



