बीएमसी चुनाव 2026: भाजपा-शिंदे गठबंधन की जीत, ठाकरे युग समाप्त
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के ऐतिहासिक चुनावी नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। तीन दशकों से मुंबई की सत्ता पर काबिज ठाकरे परिवार का 'मातोश्री' वर्चस्व आखिरकार समाप्त हो गया है।
16 जनवरी को घोषित परिणामों में भाजपा-शिंदे गठबंधन (महायुति) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर ठाकरे परिवार के 'आखिरी किले' को ध्वस्त कर दिया। अब देश के सबसे अमीर नगर निकाय में भाजपा का मेयर बैठेगा। महाराष्ट्र की अन्य 28 महानगरपालिकाओं में भी भाजपा को अधिकांश जीत मिली।
बीजेपी-शिंदे गठबंधन ने बीएमसी में प्रचंड जीत दर्ज की
कुल 227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटें आवश्यक थीं। भाजपा और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर 127 सीटें जीतीं, जिसमें भाजपा को 97 और शिंदे गुट की शिवसेना को 30 सीटें मिलीं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को मिलाकर 73 सीटें मिलीं, जिसमें 64 यूबीटी और 9 मनसे को मिलीं।
ठाकरे बंधु 20 साल बाद एक साथ आने के बावजूद बीएमसी की सत्ता हासिल नहीं कर पाए। कांग्रेस, महाविकास आघाड़ी से अलग होकर लड़ी, और प्रमुख गठबंधनों के बीच फंस गई। प्रकाश आंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी से गठबंधन के बावजूद केवल 15 सीटों तक सीमित रही। एआईएमआईएम ने छह सीटें जीतीं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस ऐतिहासिक जीत पर लिखा कि भाजपा ने 2025-26 के महानगरपालिका चुनावों में जीत हासिल कर एक बार फिर इतिहास लिखा। यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के नेतृत्व और प्रयासों का परिणाम है।
भाजपा की जीत के प्रमुख कारण
दादर, परेल और लालबाग जैसे ठाकरे गढ़ इस बार विभाजित हुए। शिंदे गुट ने भाजपा को वर्ली और गिरगांव में मदद दी, जिससे ठाकरे ब्रांड कमजोर पड़ा। बीएमसी का वार्षिक बजट ₹74,000 करोड़ से अधिक है, और भाजपा ने 'भ्रष्टाचार मुक्त बीएमसी' और 'ट्रिपल इंजन सरकार' का नारा दिया। गुजराती, उत्तर भारतीय और मध्यम वर्गीय मराठी मतदाताओं ने भाजपा का समर्थन किया।
शिवसेना का दो फाड़ होना उद्धव ठाकरे के लिए भारी नुकसान साबित हुआ। कोस्टल रोड और मुंबई मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट्स का श्रेय भाजपा-शिंदे सरकार को गया। भाजपा गलियारों में चर्चा है कि अगले मेयर के लिए किसी अनुभवी मराठी चेहरे को जिम्मेदारी दी जा सकती है। ठाकरे पार्टी के लिए आगे की राजनीतिक राह कठिन होती दिख रही है। भाजपा ने मुंबई पर कब्जा कर राज्य की राजनीति में अपनी ताकत मजबूत कर ली है।