बॉम्बे हाई कोर्ट ने सिंगल मदर को पूर्ण अभिभावक मानते हुए पिता का नाम स्कूल रिकॉर्ड्स से हटाने का आदेश दिया


बॉम्बे हाई कोर्ट ने सिंगल मदर को पूर्ण अभिभावक मानते हुए पिता का नाम स्कूल रिकॉर्ड्स से हटाने का आदेश दिया

19 फरवरी को बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने एक दुष्कर्म पीड़िता मां की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उसने अपनी बेटी के स्कूल रिकॉर्ड्स से पिता का नाम हटाने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि बच्चे का पालन-पोषण अकेले करने वाली मां को पूर्ण अभिभावक मानना दया नहीं, संविधान के प्रति निष्ठा है।

जस्टिस विभा कांकणवाड़ी और जस्टिस हितेन वेणुगावकर की पीठ ने कहा कि बच्चे की पहचान उस पिता से क्यों जोड़नी, जिसका उससे कोई संबंध नहीं है? संविधान का अनुच्छेद 21 सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है और पहचान भी उसी गरिमा का हिस्सा है।

इस मामले में मां दुष्कर्म पीड़िता है। डीएनए टेस्ट से आरोपी बॉयोलॉजिकल पिता सिद्ध हुआ था, लेकिन उसने बच्चे से अलग रहना चुना। इसके बावजूद, जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल रिकॉर्ड में पिता का नाम दर्ज था। स्कूल ने इसमें संशोधन से इनकार किया, तो मां-बेटी हाई कोर्ट पहुंचीं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूल जाति प्रमाणन प्राधिकरण नहीं है, लेकिन विशेष मामलों में रिकॉर्ड में संशोधन किया जा सकता है।




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