सबसे निचले तबके के 10 प्रतिशत लोगों में खपत बढ़ी, गरीबी घटी
सरकार के लक्षित कल्याणकारी उपायों से गरीबी में उल्लेखनीय कमी आई है और आय वितरण में सुधार हुआ है। संसद में 29 जनवरी को पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि सबसे निचली पांच से 10 प्रतिशत आबादी के उपभोग व्यय में सबसे तेज वृद्धि हुई है।
समीक्षा में सब्सिडी, पेंशन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा पर सार्वजनिक व्यय के सकारात्मक परिणामों का उल्लेख किया गया है। इन उपायों से कमजोर वर्ग अभाव से बाहर आया है। यह नवीनतम घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES 2023-24) से सामने आया है, जो उपभोग असमानता में कमी और सबसे वंचित समूह को लाभ दिखाता है।
2022-23 और 2023-24 के बीच प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय (MPCE) में सबसे बड़ी वृद्धि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सबसे निचली पांच से 10 प्रतिशत आबादी के बीच देखी गई। यह सरकारी नीतियों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। समीक्षा के अनुसार, "गरीबी के दुष्चक्र से कमजोर वर्ग को बाहर निकालने के लिए सरकार के उपायों का सकारात्मक परिणाम हुआ है।"
आय वितरण और ग्रामीण विकास पर प्रभाव
समीक्षा में बताया गया कि सरकारी नीतियों का आय वितरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। मुख्य रूप से सब्सिडी, पेंशन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा पर सार्वजनिक व्यय के माध्यम से आय वितरण में सुधार हुआ है।
ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए स्थानीय अवसरों और नवोन्मेष के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। विशेष रूप से सबसे कमजोर वर्ग, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, उपभोग में वृद्धि का उल्लेख किया गया है।
समीक्षा में कहा गया कि ग्रामीण समुदाय नए कौशल सीख सकता है, आजीविका प्राप्त कर सकता है, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता बनाए रख सकता है, घरेलू सामंजस्य बहाल कर सकता है, आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर सकता है और सांस्कृतिक विरासत एवं पर्यावरण को संरक्षित कर सकता है। सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित सर्वेक्षणों के माध्यम से लक्षित हस्तक्षेपों पर भी जोर दिया गया है।