लागत से कम पर बिजली नहीं बेची जा सकेगी - एनईपी 2026


लागत से कम पर बिजली नहीं बेची जा सकेगी: एनईपी 2026 मसौदा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में दी जा रही बिजली सब्सिडी और मुफ्त बिजली की प्रथा अधिक समय तक जारी नहीं रहेगी। उद्योगों को महंगी बिजली बेचकर कुछ वर्ग को लागत से कम बिजली देने की परंपरा समाप्त की जाएगी।

एनईपी 2026 मसौदे के मुख्य बिंदु

सब्सिडी के लिए बजट का प्रावधान

NEP-2026 का उद्देश्य डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति को बहाल करना और अत्यधिक क्रॉस सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है। यदि कोई राज्य सरकार बिजली सब्सिडी देती है, तो उसके लिए बजट में पहले से प्रावधान करना आवश्यक होगा। इसका मुख्य फोकस लागत-आधारित टैरिफ लागू करना है ताकि डिस्कॉम कर्ज के जाल से बाहर निकल सकें।

डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति

एनईपी के अनुसार, देश की सभी डिस्कॉम का कुल कर्ज ₹7.18 लाख करोड़ है और कुल हानि ₹6.9 लाख करोड़ से अधिक हो चुकी है। यदि राज्य बिजली नियामक आयोग टैरिफ आदेश जारी नहीं करते हैं, तब भी टैरिफ को स्वचालित वार्षिक संशोधन सूचकांक के अनुसार बढ़ाया जाएगा। किसी भी स्थिति में बिजली की दर स्थिर लागत से कम नहीं होगी।

उद्योग और बड़े उपभोक्ताओं के लिए छूट

मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे पर क्रॉस सब्सिडी और सरचार्ज से छूट का प्रस्ताव है, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और लॉजिस्टिक लागत घटे। 1 मेगावाट या अधिक लोड वाले उपभोक्ता यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन से मुक्त होंगे और किसी भी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी से बिजली खरीद सकते हैं। डिस्कॉम को किसी विशेष क्षेत्र में बिजली देने का अनिवार्य निर्देश नहीं होगा।

फायदे और चिंताएं

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने निजी कंपनियों के लिए यूनिवर्सल सप्लाई से छूट का विरोध किया है, क्योंकि इससे कंपनियां केवल लाभ वाले क्षेत्रों में बिजली दे सकती हैं और ग्रामीण, कृषि व गरीब उपभोक्ताओं की उपेक्षा कर सकती हैं। मसौदे में दावा किया गया है कि इससे छोटे उपभोक्ताओं की आपूर्ति लागत कम होगी और उद्योग सस्ती बिजली प्राप्त कर सकेंगे।

2030 तक कृषि फीडरों का सोलराइजेशन

NEP 2026 प्रस्तावित करता है कि 2030 तक सभी कृषि फीडरों का सोलराइजेशन और स्टोरेज किया जाएगा, ताकि किसानों को दिन में स्थिर बिजली आपूर्ति मिल सके। वर्ष 2030 तक राज्यों पर सब्सिडी का बोझ खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति के अनुसार, पावर सेक्टर में 2032 तक ₹50 लाख करोड़ और 2047 तक ₹200 लाख करोड़ का निवेश आवश्यक होगा।




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