बड़े औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास बनेंगी पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप
केंद्रीय बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों की घोषणा की गई है। इनमें प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के आसपास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप की स्थापना, हर जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास, 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना और शिक्षा के लिए स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) की दर को घटाकर दो प्रतिशत करना शामिल है।
शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल 1.39 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया है, जिसमें 55,727 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं।
यूनिवर्सिटी टाउनशिप के लिए राज्यों को सहयोग
लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026–27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि सरकार प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के आसपास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाने में राज्यों को सहयोग देगी।
अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा, “इन प्रस्तावित शैक्षणिक क्षेत्रों में कई विश्वविद्यालय, कॉलेज, अनुसंधान संस्थान, कौशल विकास केंद्र और आवासीय परिसर शामिल होंगे।”
हर जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास
वित्त मंत्री ने देश के प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास स्थापित करने की घोषणा की। वर्तमान में देश में 700 से अधिक जिले हैं।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) संस्थानों में लंबे समय तक अध्ययन और प्रयोगशाला कार्य के कारण छात्राओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए वीजीएफ या पूंजीगत सहायता के माध्यम से हर जिले में छात्रावास बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
रचनात्मक और चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा
बजट में पशु चिकित्सा महाविद्यालयों, अस्पतालों और निदान प्रयोगशालाओं के लिए ऋण आधारित पूंजी सब्सिडी सहायता योजना का प्रस्ताव किया गया है।
इसके अलावा, मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी को 15,000 माध्यमिक विद्यालयों में कंटेंट लैब स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव भी बजट में शामिल है।
शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया और नए संस्थान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बजट की सराहना करते हुए इसे “विकसित भारत का बजट” बताया।
उन्होंने कहा कि यह बजट शिक्षा और रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है और विकास के अगले चरण के लिए एक स्पष्ट खाका प्रस्तुत करता है। देश के हर कोने में शिक्षा और भविष्य के लिए तैयार कौशल को मजबूत करने हेतु बड़े और साहसिक निवेश प्रस्तावित किए गए हैं।
बजट में पूर्वी क्षेत्र में एक नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) की स्थापना का भी प्रस्ताव किया गया है।
एलआरएस के तहत टीसीएस दर में कटौती
वित्त मंत्री ने उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए टीसीएस दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है।
एलआरएस के तहत 10 लाख रुपये से अधिक या कुल प्रेषित राशि पर शिक्षा या चिकित्सा उपचार के लिए अब दो प्रतिशत टीसीएस लागू होगा। इस योजना के अंतर्गत सभी निवासी व्यक्ति, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं, प्रति वित्त वर्ष अधिकतम 2,50,000 अमेरिकी डॉलर तक की राशि विदेश भेज सकते हैं।
हालांकि, शिक्षा और चिकित्सा उपचार के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए टीसीएस दर 20 प्रतिशत बनी रहेगी।
शिक्षा से रोजगार और उद्यम पर उच्चस्तरीय समिति
केंद्रीय बजट में सेवा क्षेत्र पर केंद्रित उपायों की सिफारिश के लिए “शिक्षा से रोजगार और उद्यम” विषय पर एक उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव किया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इससे भारत 2047 तक सेवा क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी देश बनेगा और वैश्विक बाजार में इसकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। समिति विकास, रोजगार और निर्यात की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि समिति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के रोजगार और कौशल आवश्यकताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करेगी और आवश्यक उपाय सुझाएगी।



