जेन-जी आईक्यू में माता-पिता से कम बुद्धिमान, डिजिटल तकनीक कारण


जेन-जी आईक्यू में माता-पिता से कम बुद्धिमान, डिजिटल तकनीक कारण

जेन-जी (15 से 27 साल के युवा) पहली ऐसी पीढ़ी बन गए हैं, जिनकी बुद्धि (आईक्यू) उनके माता-पिता की पीढ़ी से कम है। यह खुलासा न्यूरो साइंटिस्ट डॉ. जारेड कुनी हॉरवाथ ने अमेरिकी सीनेट की कमेटी में किया। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक पर अधिक निर्भरता इसकी मुख्य वजह है।

डॉ. हॉरवाथ ने कहा कि 1800 के दशक के उत्तरार्ध से पहली बार किसी पीढ़ी का आईक्यू, मेमोरी, ध्यान, पढ़ाई, गणित और समस्या सुलझाने की क्षमता पिछली पीढ़ी से कम हुई है। इंसानी दिमाग छोटे वीडियो और संक्षिप्त वाक्यों से सीखने के लिए नहीं बना है। गहराई से पढ़ाई और आमने-सामने बातचीत अधिक प्रभावी है।

यूरोप के स्कूलों में डिजिटल गैजेट्स पर नियंत्रण

स्वीडन ने हाल ही में स्कूलों में डिजिटल गैजेट्स हटाकर कागज-कलम और प्रिंटेड किताबों की ओर लौटने का फैसला किया। फ्रांस, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन और फिनलैंड ने भी टैबलेट और लैपटॉप के इस्तेमाल को सीमित किया। यूनेस्को की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि शिक्षा में तकनीक का अत्यधिक इस्तेमाल तब तक फायदेमंद नहीं है जब तक यह सीखने में मदद न करे।

जेन-जी का अति आत्मविश्वास

डॉ. हॉरवाथ ने कहा कि जेन-जी के युवा अपनी बुद्धिमानी को लेकर जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वासी हैं और अपनी कमजोरी का अहसास नहीं है। शिक्षा विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि बच्चों को स्मार्टफोन देने में देरी की जाए और छोटे बच्चों को फ्लिप फोन दिए जाएं। स्कूलों में टेक्नोलॉजी पर राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रण के कदम उठाए जाएं। इसे ‘सामाजिक आपातकाल’ बताया गया।

अत्यधिक स्क्रीन टाइम का प्रभाव

रिसर्च में 80 देशों के आंकड़े शामिल हैं। जो बच्चे रोजाना 5 घंटे कंप्यूटर पर पढ़ाई करते हैं, उनके स्कोर उन बच्चों से कम होते हैं जो तकनीक का कम या बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करते। जब हर छात्र को अलग डिवाइस देने की योजना शुरू हुई, तो उनके स्कोर में तेज गिरावट आई।




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