दो साल में दोगुना हुआ गोल्ड लोन पोर्टफोलियो
एक रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 तक दो वर्षों में पूरे वित्तीय सिस्टम में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो लगभग दोगुना होकर 15.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सोने की कीमतों में आई तेजी ने लेंडर्स को इस सुरक्षित सेगमेंट में अपना एक्सपोजर बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
नवंबर 2025 तक के एक साल में सोने के बदले लोन देने में 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो नवंबर 2024 तक के साल में हुई 39 प्रतिशत की ग्रोथ के अतिरिक्त है। इसके चलते गोल्ड लोन बुक नवंबर 2023 में 7.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग दोगुनी होकर 15.6 लाख करोड़ रुपये हो गई।
एक क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड लोन में बढ़े भरोसे की वजह से कुल रिटेल लोन पोर्टफोलियो में इसकी हिस्सेदारी भी एक साल पहले के 8.1 प्रतिशत से बढ़कर नवंबर 2025 के अंत तक 9.7 प्रतिशत हो गई है।
CRIF हाई मार्क ने बताया कि बढ़ती सोने की कीमतों और मजबूत कोलैटरल के कारण पोर्टफोलियो में वृद्धि हो रही है। सोने के दाम बढ़ने से उधारकर्ताओं की लोन एलिजिबिलिटी भी बढ़ गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्टिव गोल्ड लोन की संख्या में केवल 10.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि 2.5 लाख रुपये से अधिक के लोन नवंबर 2025 तक कुल लोन बुक का लगभग आधा हिस्सा बन चुके हैं, जो मार्च 2023 में 36.4 प्रतिशत था।
कुल गोल्ड लोन में से 56 प्रतिशत से अधिक पुरुष कर्जदारों द्वारा लिए गए हैं, जबकि महिला कर्जदारों का रीपेमेंट व्यवहार बेहतर पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, तेज लेंडिंग के कारण FY25 के ओरिजिनेशन वॉल्यूम और वैल्यू FY26 के पहले आठ महीनों में ही पार हो गए।
सरकारी बैंकों की इस सेगमेंट में 60 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी है, जबकि गोल्ड लोन पर फोकस करने वाली NBFCs के पास पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग का 8.1 प्रतिशत हिस्सा है।
एसेट क्वालिटी के नजरिए से रिपोर्ट में कहा गया है कि रीपेमेंट में सुधार हुआ है और नवंबर 2025 तक के साल में सभी ओवरड्यू बकेट में स्ट्रेस वाला पोर्टफोलियो कम हुआ है। गोल्ड लोन सभी रिटेल लोन श्रेणियों में सबसे कम डिफॉल्ट स्तर दिखा रहा है।
क्षेत्रीय वितरण की बात करें तो गोल्ड लोन पोर्टफोलियो का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा दक्षिणी राज्यों में केंद्रित है, जबकि शीर्ष 10 राज्यों में 90 प्रतिशत से अधिक आउटस्टैंडिंग दर्ज की गई है।
नवंबर 2025 तक के साल में गुजरात ने 67 प्रतिशत की वृद्धि के साथ पोर्टफोलियो ग्रोथ में बढ़त बनाई, जबकि कर्नाटक और महाराष्ट्र ने 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की।



