हाई कोर्ट का फैसला: मुस्लिम व्यक्ति एक-तिहाई से अधिक संपत्ति की वसीयत नहीं कर सकता
हाई कोर्ट का अहम फैसला: मुस्लिम व्यक्ति एक-तिहाई से अधिक संपत्ति की वसीयत नहीं कर सकता
हाई कोर्ट ने मुस्लिम वसीयत को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी मुस्लिम व्यक्ति अपने कानूनी वारिसों की अनुमति के बिना अपनी संपत्ति का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा वसीयत के माध्यम से नहीं दे सकता।
यह फैसला जस्टिस बी.डी. गुरु की एकलपीठ द्वारा एक विधवा की याचिका पर सुनाया गया। इससे पहले सेशन और जिला न्यायालय ने महिला को उसके पति की संपत्ति में हिस्सा देने से इनकार कर दिया था।
अदालत के प्रमुख बिंदु
- मुस्लिम कानून के अनुसार व्यक्ति केवल अपनी संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा ही वसीयत कर सकता है।
- एक-तिहाई से अधिक संपत्ति तभी दी जा सकती है जब सभी कानूनी वारिस मृत्यु के बाद स्पष्ट सहमति दें।
- सहमति स्वेच्छा और पूरी समझ के साथ होनी चाहिए।
- यदि विधवा की स्पष्ट सहमति सिद्ध नहीं होती है, तो वसीयत एक-तिहाई से अधिक मान्य नहीं होगी।
कानूनी सिद्धांत
हाई कोर्ट ने कहा कि उत्तराधिकारियों के अधिकारों की रक्षा करना मुस्लिम कानून का मूल सिद्धांत है। इसलिए बिना सहमति के एक-तिहाई से अधिक संपत्ति की वसीयत कानूनी रूप से मान्य नहीं मानी जाएगी।
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