इग्नू बना समावेशी शिक्षा का मॉडल, ग्रामीण और वंचितों तक पहुंच
उपराष्ट्रपति ने इग्नू की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसे भारत के खुले और दूरस्थ शिक्षा तंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
उन्होंने कहा कि इग्नू ने देशभर में उच्च शिक्षा तक पहुंच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है।
इसके समावेशी विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि इग्नू में 14 लाख से अधिक छात्र हैं, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाएं और 58 प्रतिशत ग्रामीण एवं वंचित समुदायों से आते हैं।
उन्होंने कहा कि इग्नू के छात्रों की संख्या कई देशों की जनसंख्या से भी अधिक है, जो शैक्षिक समानता और सामाजिक विकास में इसके योगदान को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को आजीवन सीखने, मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
कोविड-19 महामारी के दौरान इग्नू ने अपनी मजबूत दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के कारण निरंतर शिक्षा सुनिश्चित की।
विश्वविद्यालय ने स्वयं और ई-ज्ञानकोष जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का प्रभावी उपयोग करते हुए तकनीक-आधारित शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई।