भारत-ईयू संबंध: नई शुरुआत और दक्षिण एशिया पर असर


भारत-ईयू संबंध: नई शुरुआत से पूरे दक्षिण एशिया में बदलाव

27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए शिखर सम्मेलन ने केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा नहीं दी, बल्कि इसके दूरगामी असर दक्षिण एशिया की कूटनीति और आर्थिक संरचना पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से यूरोपीय बाजार में बांग्लादेश और पाकिस्तान से होने वाले वस्त्र निर्यात का एक हिस्सा भारत की ओर शिफ्ट होने की संभावना है। रक्षा और सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने से यूरोप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की पारंपरिक लॉबिंग को भी बड़ा झटका लग सकता है।

कश्मीर और खालिस्तान जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान की रणनीति अब पहले जैसी आसान नहीं रहने वाली मानी जा रही है। सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत और EU द्वारा सहयोग भी पाकिस्तान की योजनाओं पर भारी पड़ सकता है।

FTA की घोषणा से पाकिस्तान और बांग्लादेश में चिंता के स्वर उठने लगे हैं। पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गोहार एजाज ने कहा कि यदि एहतियाती कदम नहीं उठाए गए तो भारत की इस डील से उनके देश में करीब एक करोड़ लोगों की नौकरियों पर खतरा हो सकता है।

वर्तमान में यूरोपीय संघ भारत से आयात होने वाले अधिकांश वस्त्र और परिधान उत्पादों पर औसतन 12-16% आयात शुल्क लगाता है, जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान को "Everything But Arms" (EBA) और GSP Plus जैसी योजनाओं के तहत लगभग शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त है। प्रस्तावित FTA के बाद भारत को भी यूरोपीय संघ के बाजार में लगभग शून्य शुल्क पर पहुंच मिल जाएगी, जिससे भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ को लगभग 7 अरब डॉलर के वस्त्र और परिधान निर्यात करता है। तुलना में, बांग्लादेश 16 अरब डॉलर से अधिक और पाकिस्तान लगभग 6 अरब डॉलर का निर्यात करता है। भारतीय वस्त्र क्षेत्र पूरी तरह आत्मनिर्भर है और बेहतर आपूर्ति श्रृंखला, कच्चे माल की उपलब्धता और उत्पादन क्षमता की वजह से FTA का अधिक लाभ उठा सकता है।

पाकिस्तान लंबे समय से यूरोपीय देशों में भारत के खिलाफ लॉबिंग करता रहा है। इसके लिए डिप्लोमैटिक चैनल, डायस्पोरा समुदाय, NGOs, मीडिया और सोशल मीडिया का उपयोग किया जाता है। पूर्व में इटली, जर्मनी और पोलैंड में खालिस्तान को समर्थन देने के लिए फंडिंग की जानकारी भी सामने आई थी। वर्ष 2019 में जब भारत ने कश्मीर से धारा 370 समाप्त की थी, तो पाकिस्तान ने इसे यूरोपीय संसद में उठाने की कोशिश की थी। अब भारत EU के समक्ष अधिक मजबूती से यह मुद्दा रख सकता है।




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