ईयू से व्यापार समझौते में बाजी मार ले गया भारत
अमेरिका ने कहा है कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुए व्यापार समझौते में भारत ने बाजी मार ली है। ट्रंप प्रशासन की ओर से इस समझौते पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि इस डील से भारत को सबसे अधिक लाभ होता दिख रहा है।
ग्रीर भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए इस व्यापार समझौते को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है। उन्होंने 27 जनवरी को फॉक्स बिजनेस को दिए एक साक्षात्कार में इस पर अपनी राय रखी।
ग्रीर ने कहा, “मैंने अब तक इस सौदे के कुछ विवरण देखे हैं। सच कहूं तो मुझे लगता है कि इससे भारत को सबसे ज्यादा फायदा होगा।” उन्होंने बताया कि इस समझौते से भारत की यूरोपीय बाजारों तक पहुंच बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को इस डील के तहत कुछ अतिरिक्त आव्रजन (इमिग्रेशन) से जुड़े लाभ मिले हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्हें पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारतीय कामगारों के यूरोप में आवागमन को लेकर बयान दिया है।
ग्रीर के अनुसार, भारत के पास कम लागत वाला श्रम बल है, जिससे उसे इस समझौते के तहत बड़ा फायदा मिल सकता है और यूरोपीय बाजार में उसकी स्थिति और मजबूत होगी।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ वैश्वीकरण (Globalization) पर अधिक जोर दे रहा है, जबकि अमेरिका वैश्वीकरण से जुड़ी कुछ समस्याओं को अपने देश के भीतर सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
जब उनसे भारत–यूरोपीय संघ व्यापार समझौते पर उनकी राय पूछी गई, तो ग्रीर ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी थी। इसी नीति के तहत अमेरिका ने अन्य देशों के उत्पादों पर शुल्क लगाना शुरू किया।
उन्होंने बताया कि इसके चलते अन्य देश अपने अतिरिक्त उत्पादन के लिए वैकल्पिक बाजार तलाश रहे हैं। यही वजह है कि यूरोपीय संघ भारत की ओर रुख कर रहा है। चूंकि यूरोपीय संघ व्यापार पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए अगर वह अपना सारा माल अमेरिका नहीं भेज पाता, तो उसे अन्य विकल्पों की आवश्यकता होगी।



