भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा


भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा

दावोस में आयोजित एक विशेष सत्र में भारत के दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान कहा गया कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और जीएसटी जैसे संरचनात्मक सुधारों ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान किया है। कम महंगाई को भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया गया।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2025 में भारत की उपस्थिति बेहद प्रभावशाली रही। लगातार बढ़ती अर्थव्यवस्था, व्यापक सुधार और वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि ने भारत को इस वैश्विक मंच का केंद्र बिंदु बना दिया।

भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना

अमेरिका और भारत की अर्थव्यवस्था की विशेषज्ञ गीता गोपीनाथ ने भारत की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा, “डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास अत्यंत प्रभावशाली रहा है, और जीएसटी जैसे सुधार, जिनमें हाल ही में की गई सरलता भी शामिल है, भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सहायक सिद्ध हुए हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास एक मजबूत आधार है, जहां तेज़ आर्थिक वृद्धि के साथ महंगाई अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।

संरचनात्मक और पर्यावरणीय चुनौतियां

हालांकि, गीता गोपीनाथ ने कुछ संरचनात्मक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। भूमि अधिग्रहण, अस्पष्ट भूमि रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी विकास और विनिर्माण के मार्ग में बड़ी बाधाएं हैं। भारत की जनसांख्यिकीय ताकत के बावजूद श्रम भागीदारी दर केवल लगभग 30 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि मानव पूंजी का विकास और कार्यबल के कौशल को वैश्विक मांगों के अनुरूप बनाना अत्यंत आवश्यक है। पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां भी एक गंभीर विषय हैं।

प्रदूषण: एक गंभीर आर्थिक चुनौती

गीता गोपीनाथ ने कहा, “प्रदूषण किसी भी आयात-निर्यात शुल्क या टैरिफ से कहीं अधिक गंभीर चुनौती है।” विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर वर्ष लगभग 17 लाख लोगों की मृत्यु प्रदूषण के कारण हो जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण की स्थिति निवेश आकर्षण को सीधे प्रभावित करती है।

उद्योग जगत का भरोसा

उद्योग जगत की ओर से भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने भारत की वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में तेजी से उभरने की संभावनाओं पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “भारत पहले से ही मजबूत स्थिति में है। यदि जीडीपी 25–30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाती है, तो भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।”

तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह

भारत की दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह उज्ज्वल है, लेकिन यह आसान नहीं है। मजबूत विकास दर, व्यापक सुधार और युवा आबादी इसकी नींव हैं, लेकिन प्रदूषण, न्यायिक और श्रम सुधार, तथा मानव पूंजी विकास जैसी चुनौतियों का समाधान जरूरी है।

दावोस 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत के पास वैश्विक आर्थिक नेतृत्व हासिल करने की पूरी क्षमता है और “विकसित भारत 2047” के सपने को साकार करने का एक ऐतिहासिक अवसर भी।




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