स्वदेशी तकनीक से भारत के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र को मिला नवजीवन
18 फरवरी को भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ी सफलता मिली जब तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (टीएपीएस) की यूनिट-1 का स्वदेशी तकनीक से जीर्णोद्धार सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित यह संयंत्र अब पुनः 160 मेगावाट बिजली उत्पादन करने लगा है। यह उपलब्धि इसलिए विशेष है क्योंकि भारत एशिया का पहला देश बन गया है जिसने किसी पुराने परमाणु रिएक्टर का जीवनकाल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बढ़ाया है।
यूनिट-2 का कार्य अंतिम चरण में
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, संयंत्र की यूनिट-2 का कार्य भी अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में इसे राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा।
इस संयंत्र का संचालन न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) करता है। नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए इसे वर्ष 2020 में बंद किया गया था।
उन्नत तकनीक से बढ़ा रिएक्टर का जीवनकाल
जीर्णोद्धार प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग छह वर्ष लगे। टीएपीएस-1 और टीएपीएस-2 वर्ष 1969 में चालू हुए थे और एशिया के शुरुआती परमाणु रिएक्टरों में शामिल हैं।
सामान्यतः परमाणु रिएक्टरों की आयु 40-50 वर्ष मानी जाती है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने उन्नत तकनीक के माध्यम से इसकी उपयोगिता बढ़ाई। इसमें शामिल हैं:
- नई पाइपिंग प्रणाली
- टरबाइन-जनरेटर अपग्रेड
- डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम
- आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की स्वच्छ ऊर्जा में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होगी।
3-डी लेजर स्कैनिंग से बढ़ी सुरक्षा
नवीनीकरण के दौरान कई उन्नत सुरक्षा उपाय अपनाए गए, जिनमें शामिल हैं:
- 3-डी लेजर स्कैनिंग तकनीक
- जंग-रोधी सामग्री का उपयोग
- नई सुरक्षा प्रणालियां
- कंट्रोल रूम का आधुनिकीकरण
अपने पिछले संचालन काल में इस संयंत्र ने स्वच्छ बिजली उत्पादन कर कार्बन उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
तारापुर संयंत्र की पुनः शुरुआत को भारत की परमाणु इंजीनियरिंग क्षमता और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भविष्य में पुराने परमाणु रिएक्टरों के नवीनीकरण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।