परिसीमन के बाद लोकसभा में होंगे 850 सदस्य
संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू हो रहा है, जो तीन दिनों तक चलेगा। इस सत्र में सरकार परिसीमन से जुड़े विधेयकों को पेश करेगी। सत्र के हंगामेदार होने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष इन प्रस्तावों का जोरदार विरोध कर रहा है और सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं कर रहा है।
तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे गैर-बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच यह बहस जारी है कि विपक्ष विरोध क्यों कर रहा है, सरकार का पक्ष क्या है और संसद में सीटों की संख्या कितनी बढ़ेगी।
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: इस विधेयक के माध्यम से लोकसभा की संरचना में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है, जिसमें 815 सदस्य राज्यों से और 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से होंगे।
परिसीमन विधेयक, 2026: यह विधेयक परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान करता है, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा की जाएगी। इसका उद्देश्य राज्यों के बीच सीटों का पुनर्वितरण, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण और नवीनतम जनगणना के आधार पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा महिलाओं के लिए आरक्षण तय करना है।
केंद्र शासित प्रदेश विधि (संशोधन) विधेयक, 2026: यह विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों को परिसीमन और महिलाओं के लिए आरक्षण से संबंधित नए संवैधानिक ढांचे के अनुरूप बनाने का उद्देश्य रखता है।