महू में हवलदार पीरू सिंह शेखावत के नाम पर होगा मॉलकॉम लाइन्स का नाम
इंदौर के पास स्थित महू (MHOW) आज भारतीय सेना की रीढ़ माना जाता है। यहां इन्फैंट्री स्कूल, आर्मी वॉर कॉलेज और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित सैन्य संस्थान मौजूद हैं।
दुनिया के कई देशों के सैन्य अधिकारी यहां प्रशिक्षण लेने आते हैं। इसी कारण महू को भारतीय सेना का ‘ब्रेन प्लेस’ भी कहा जाता है।
ब्रिटिश काल के नामों में बदलाव
भारतीय सेना ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने 246 प्रतिष्ठानों के ब्रिटिश काल से चले आ रहे नामों को बदलने का निर्णय लिया है। इन नए नामों को वीरता पुरस्कार विजेताओं, युद्ध नायकों और प्रमुख सैन्य नेताओं के सम्मान में रखा गया है।
इस बदलाव में 124 सड़कें, 77 रिहायशी कॉलोनियां, 27 इमारतें और सैन्य सुविधाएं तथा 18 अन्य सुविधाएं शामिल हैं, जिनमें पार्क, प्रशिक्षण क्षेत्र, खेल मैदान, गेट और हेलिपैड भी हैं।
मॉलकॉम लाइन्स का बदला नाम
इसी कड़ी में महू छावनी की मॉलकॉम लाइन्स का नाम बदलकर अब परमवीर चक्र विजेता हवलदार पीरू सिंह शेखावत के नाम पर पीरू सिंह लाइन्स रखा गया है।
इससे पहले भी महू स्थित इन्फैंट्री स्कूल और आर्मी वॉर कॉलेज के आसपास के कई पुराने गेट और मेस के नाम अंग्रेज अफसरों के नाम से हटाकर भारतीय युद्ध नायकों के नाम पर रखे जा चुके हैं।
महू: भारतीय सेना का ‘ब्रेन प्लेस’
महू की स्थापना 1818 में अंग्रेजों द्वारा की गई थी। यह क्षेत्र उन्होंने होलकर साम्राज्य से अपनी रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए प्राप्त किया था।
वर्ष 1817 में अंग्रेजों और होलकर सेना के बीच महिदपुर का युद्ध हुआ था। इसके बाद 6 जनवरी 1818 को मंदसौर की संधि हुई, जिसके तहत अंग्रेजों को मालवा क्षेत्र में अपनी सेना तैनात करने की अनुमति मिली।
आज महू भारतीय सेना की ताकत और रणनीतिक क्षमता का प्रतीक है। यहां मौजूद विश्वस्तरीय प्रशिक्षण संस्थान न केवल भारतीय बल्कि विदेशी सैन्य अधिकारियों को भी प्रशिक्षित कर रहे हैं।