दोहरी सफलता: सीबीएसई और एमपी बोर्ड परिणामों में इंदौर के मेधावी छात्र छाए
इस वर्ष एमपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं के परिणामों में सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन किया। 10वीं में 76.80% और 12वीं में 80.43% परिणाम के साथ सरकारी विद्यालय आगे रहे।
छात्राओं ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सफलता पर शिक्षकों और छात्रों को बधाई दी।
इस वर्ष के परिणामों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां सरकारी स्कूलों ने निजी संस्थानों को पीछे छोड़ दिया, जिससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार स्पष्ट दिखाई देता है।
कक्षा 10वीं (हाईस्कूल) परिणाम
सरकारी स्कूलों का परिणाम 76.80% रहा, जबकि निजी स्कूलों का परिणाम 68.64% रहा।
कुल 8,97,061 छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें 73.42% नियमित और 26.38% स्वाध्यायी छात्र पास हुए।
छात्राओं का परिणाम 77.52% रहा, जो छात्रों के 69.31% से बेहतर है।
कक्षा 12वीं (हायर सेकेंडरी) परिणाम
12वीं में भी सरकारी स्कूलों का दबदबा रहा, जहां उनका परिणाम 80.43% रहा, जबकि निजी स्कूल 69.67% तक सीमित रहे।
कुल 6,89,746 छात्रों में से 76.01% नियमित छात्र पास हुए, जो पिछले 16 वर्षों में सबसे बेहतर परिणाम है।
यहां भी छात्राओं ने 79.41% के साथ छात्रों (72.39%) से बेहतर प्रदर्शन किया।
टॉपर्स
12वीं वाणिज्य संकाय में खुशी राय (शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय, भोपाल) ने 494 अंक हासिल कर टॉप किया। वहीं चांदनी विश्वकर्मा (प्राइवेट स्कूल) ने भी समान अंक प्राप्त किए।
10वीं में प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया।
मेरिट सूची में छात्राओं का दबदबा रहा। 10वीं में 378 में से 235 छात्राएं और 12वीं में 221 में से 158 छात्राएं शामिल रहीं।
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत इस बार पूरक परीक्षा की जगह “द्वितीय अवसर परीक्षा” शुरू की गई है। इसमें असफल या अंक सुधारने वाले छात्र भाग ले सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह परिणाम शिक्षकों की मेहनत और शिक्षा व्यवस्था में सुधार का संकेत है।