नारी शक्ति वंदन अधिनियम: राजनीतिक दलों की दीवारें टूटीं


नारी शक्ति वंदन ने तोड़ी राजनीतिक दलों की दीवारें

मोदी सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम राजनीतिक दलों के बीच की दीवारों को काफी हद तक तोड़ने वाला साबित हुआ है।

खासकर विपक्षी दलों की कई महिला नेताओं ने इस कदम का खुलकर समर्थन किया है। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इसे ऐतिहासिक बताया है, जबकि बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है।

एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा की मांग

मायावती ने लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के भीतर एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा देने की मांग भी की है।

संसद का विशेष सत्र

16 अप्रैल से शुरू हुए तीन दिवसीय विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक लाया जा रहा है।

विपक्ष ने परिसीमन को लेकर सरकार के खिलाफ रणनीति बनाई है, लेकिन कई महिला नेताओं ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है।

प्रतिभा पाटिल का समर्थन

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस विधेयक का समर्थन किया और इसे ऐतिहासिक बताया।

उन्होंने कहा कि यह संविधान संशोधन लोकतंत्र को मजबूत करेगा और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं का वास्तविक सशक्तीकरण तभी संभव है जब उन्हें निर्णय प्रक्रिया में समान अवसर मिले।

मायावती का रुख

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से महिलाओं को 50% आरक्षण देने की समर्थक रही है, लेकिन 33% आरक्षण का भी वह स्वागत करती हैं।

उन्होंने एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा तय करने की मांग दोहराई।

अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार 13 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में शामिल हुईं।

कांग्रेस नेता डॉ. जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि परिसीमन की प्रतीक्षा किए बिना महिला आरक्षण लागू किया जाए।




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