सुपरटेक के अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करेगी एनबीसीसी
एक दशक से अधिक समय से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे करीब 51,000 फ्लैट खरीदारों के लिए राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक के 16 अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट पूरे करने की जिम्मेदारी सरकारी उपक्रम एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन) को सौंप दी है।
शीर्ष अदालत ने 5 फरवरी को एनसीएलएटी (नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल) के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें एनबीसीसी को इन परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया था।
एनबीसीसी के काम में कोई बाधा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि कोई भी ट्रिब्यूनल या हाई कोर्ट ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करेगा, जिससे एनबीसीसी द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य में किसी तरह की बाधा उत्पन्न हो।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अधूरे फ्लैटों का निर्माण बिना किसी रुकावट के जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल
यह आदेश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए दिया।
अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष आदेश देने की शक्ति प्रदान करता है।
एनसीएलएटी का आदेश बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर 2024 को पारित एनसीएलएटी के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एनबीसीसी को सुपरटेक के 16 अधूरे आवासीय प्रोजेक्ट अपने हाथ में लेकर पूरा करने का निर्देश दिया गया था।
इस आदेश को एपेक्स हाइट्स प्राइवेट लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
अंतरिम रोक हटाई गई
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 21 फरवरी 2025 को एनसीएलएटी के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी, लेकिन अब अंतिम फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने सभी अपीलों और याचिकाओं को निस्तारित कर दिया है।
2010–2012 से कर रहे हैं इंतजार
इन 16 हाउसिंग प्रोजेक्टों में फ्लैट खरीदारों ने 2010 से 2012 के बीच बुकिंग कराई थी, लेकिन एक दशक से ज्यादा समय बीतने के बावजूद उन्हें अब तक फ्लैट नहीं मिल पाए।
कोर्ट ने कहा कि कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी के फाइनेंशियल और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के हितों की रक्षा तभी संभव है, जब पहले पीड़ित फ्लैट खरीदारों को पूरी तरह तैयार मकान सौंपे जाएं।
सभी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि फ्लैटों में बिजली, पानी, सीवेज कनेक्शन जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं होनी चाहिए। साथ ही सड़कें और पार्क जैसी आधारभूत संरचनाएं भी विकसित की जाएं।
एनबीसीसी को एनसीएलएटी द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्माण कार्य शुरू कर उसे तेजी से पूरा करने का आदेश दिया गया है।
सुपरटेक का प्रस्ताव खारिज
सुनवाई के दौरान सुपरटेक की ओर से दलील दी गई थी कि कई प्रोजेक्टों में 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष कार्य 24 महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
हालांकि फ्लैट खरीदारों की ओर से पेश वकीलों एम.एल. लाहोटी और अश्वनी उपाध्याय ने इसका विरोध किया और एनबीसीसी को ही जिम्मेदारी सौंपने की मांग की।
उन्होंने आम्रपाली केस में एनबीसीसी द्वारा किए गए सफल कार्यों का हवाला दिया। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाया।
फिर से कोर्ट जाने की छूट
कोर्ट ने अपीलों का निपटारा करते हुए पक्षकारों को यह स्वतंत्रता दी है कि यदि प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में कोई समस्या आती है तो वे दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।