सेबी ने म्यूचुअल फंड नियमों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बदलावों को मंजूरी दी
बाजार नियामक सेबी ने 11 दिसंबर को म्यूचुअल फंड नियमों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्यापक बदलावों को मंजूरी दी। इन बदलावों में व्यय अनुपात ढांचे और ब्रोकरेज शुल्क की सीमाओं में बदलाव शामिल हैं। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य नियामकीय स्पष्टता लाना, अनावश्यक दोहराव को कम करना और अनुपालन को सरल बनाना है।
प्रस्तावित बदलावों का विवरण
सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने बताया कि सेबी बोर्ड ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके तहत सभी वैधानिक शुल्क – एसटीटी (प्रतिभूति लेनदेन शुल्क), जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर), सीटीटी (जिंस लेनदेन कर) और स्टांप शुल्क – को व्यय अनुपात की सीमा से बाहर रखा जाएगा।
इसके अलावा, इस व्यय अनुपात सीमा को अब ‘बुनियादी खर्च अनुपात’ कहा जाएगा। वर्तमान में, प्रबंधन शुल्क पर लगने वाले जीएसटी को छोड़कर अन्य सभी वैधानिक शुल्क म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए निर्धारित टीईआर (कुल व्यय अनुपात) सीमा के भीतर शामिल होते हैं। प्रस्तावित बदलाव के तहत व्यय अनुपात की सीमा को वैधानिक शुल्क से अलग रखा जाएगा ताकि भविष्य में वैधानिक शुल्क में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे निवेशकों तक पहुंच सके।
ब्रोकरेज शुल्क और अतिरिक्त शुल्क में बदलाव
बोर्ड ने परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) द्वारा म्यूचुअल फंड योजनाओं पर पहले से दिए गए अतिरिक्त पांच बेसिस प्वाइंट (बीपीएस) शुल्क को खत्म करने का फैसला किया है। इसके अलावा, निवेशकों के हितों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनसे केवल एक बार ही उचित रूप से खर्च वसूला जाए, ब्रोकरेज शुल्क को नकद बाजार लेनदेन के लिए 0.12% से घटाकर 0.06% और डेरिवेटिव लेनदेन के लिए 0.05% से घटाकर 0.02% कर दिया गया है।
इसके अलावा, नियामक ने कहा कि योजना के प्रदर्शन के आधार पर व्यय अनुपात वसूलने का प्रावधान भी पेश किया गया है, जो एएमसी के लिए स्वैच्छिक होगा।