दक्षिण के राज्यों में भी बढ़ेगा प्रतिनिधित्व: अमित शाह
लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयकों पर चर्चा के दौरान 16 अप्रैल को गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर लगभग 850 तक कैसे पहुंचेंगी।
विपक्ष का आरोप था कि परिसीमन से उत्तर भारत को फायदा होगा जबकि दक्षिणी राज्य जनसंख्या वृद्धि के अंतर के कारण पीछे रह जाएंगे। कांग्रेस ने इसे परिसीमन लागू करने का “छिपा हुआ तरीका” बताया।
अमित शाह ने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि 100 सीटों पर 33% महिला आरक्षण लागू किया जाए और कुल सीटों में 50% वृद्धि कर दी जाए तो यह संख्या 150 हो जाएगी, जिससे संतुलन बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान लोकसभा में 543 सदस्य हैं और परिसीमन के बाद सीटें लगभग 816 तक बढ़ेंगी, जिसे आसान समझ के लिए 850 कहा जाता है। इनमें से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
दक्षिण भारत पर प्रभाव
दक्षिण भारत के पांच राज्यों की कुल लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उनका प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 हो जाएगा, जिससे संतुलन बना रहेगा।
प्रस्ताव के अनुसार तमिलनाडु को 20, केरल को 10, तेलंगाना को 9 और आंध्र प्रदेश को 13 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। महाराष्ट्र को 24 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी, जिससे वह उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व वाला राज्य बन जाएगा।