कुत्तों को खाना खिलाने वाले भी जिम्मेदार : सुप्रीम कोर्ट
आवारा कुत्तों की समस्या पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी को स्पष्ट कर दिया कि वह इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है। अदालत ने कहा कि कुत्तों के काटने और हमलों की घटनाओं के लिए कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
सुनवाई के दौरान एक वकील ने कोर्ट की पिछली टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी-कभी न्यायालय की टिप्पणियों के दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोर्ट ने शायद व्यंग्य में कहा था कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा, लेकिन लोग इसे गंभीरता से ले रहे हैं और इसकी आड़ में कुत्तों को खाना खिलाने वालों के साथ मारपीट की जा रही है।
इस पर मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह बात किसी भी प्रकार के व्यंग्य के रूप में नहीं कही थी, बल्कि इसे पूरी गंभीरता के साथ कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी को अदालत के आदेशों पर टिप्पणी करने को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अवमानना की श्रेणी में आती हैं। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि वह उदारता दिखाते हुए अवमानना की कार्रवाई नहीं कर रही है।
ये टिप्पणियां आवारा कुत्तों की समस्या पर चल रही सुनवाई के दौरान की गईं। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ कर रही है।
20 जनवरी को कुत्ता प्रेमियों, पशु प्रेमी संगठनों और कुत्ते के काटने के शिकार लोगों की ओर से बहस पूरी हो गई। अब 28 जनवरी को राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और अदालत की सहायता कर रहे न्यायमित्र गौरव अग्रवाल की दलीलें सुनी जाएंगी।



