तेलंगाना जाति और सामाजिक-आर्थिक सर्वे में बड़ा खुलासा
तेलंगाना के जाति और सामाजिक-आर्थिक सर्वे में एक बड़ा खुलासा हुआ है। सर्वे के अनुसार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के लोग सामान्य वर्ग की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक पिछड़े हैं।
पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने बताया कि यह निष्कर्ष “समग्र पिछड़ापन इंडेक्स” के आधार पर निकाला गया है, जो सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के स्तर को मापता है।
सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष
- राज्य का समग्र पिछड़ापन इंडेक्स 81 दर्ज किया गया है।
- लगभग 135 जातियां अधिक पिछड़ी पाई गईं, जो कुल आबादी का 67% हिस्सा हैं।
- एससी समूह ‘डक्कल’ का पिछड़ापन स्कोर 116 (सबसे अधिक) और कापू जाति का 12 (सबसे कम) रहा।
- 78% से अधिक पिछड़े परिवारों की वार्षिक आय लगभग 1 लाख रुपये है।
- सामान्य वर्ग के 13% से अधिक परिवारों की आय 5 लाख से 50 लाख रुपये के बीच है।
- एससी-एसटी समुदाय में केवल 2.1% लोगों की आय 5 लाख रुपये से अधिक है।
- 21.2% घरों में नल का पानी उपलब्ध नहीं है।
- 13.3% परिवारों के पास शौचालय नहीं है।
- 5.8% परिवारों के पास बिजली कनेक्शन सही स्थिति में नहीं है।
मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि यह सामाजिक और आर्थिक असमानता अत्यंत चिंताजनक है।
सर्वे का दायरा और प्रक्रिया
यह रिपोर्ट तेलंगाना के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति (SEEEPC) सर्वे पर आधारित है, जिसे एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समूह ने तैयार किया है।
इस सर्वे में लगभग 3.5 करोड़ परिवारों (97% आबादी) को शामिल किया गया और 242 जाति समूहों का अध्ययन किया गया। इसमें आय, शिक्षा, रोजगार, जमीन, संपत्ति, स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं जैसे 42 संकेतकों का उपयोग किया गया।
पिछड़े समुदायों की प्रमुख समस्याएं
- शिक्षा और रोजगार के सीमित अवसर
- स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की कमी
- छोटे और भीड़भाड़ वाले घरों में जीवन
- भूमि स्वामित्व की कमी
- पीने के साफ पानी की कमी
- शौचालय और स्वच्छता सुविधाओं का अभाव
- आर्थिक अस्थिरता और कर्ज का बोझ
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई परिवार साहूकारों से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेते हैं और मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति में भी उधार पर निर्भर रहते हैं।



