ट्रंप ने 35 देशों के साथ बनाई शांति परिषद
22 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच के कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी महत्वाकांक्षी शांति परिषद (बोर्ड ऑफ पीस) बनाने की घोषणा की। कई प्रमुख देशों ने दूरी बनाई है, लेकिन लगभग 35 देश इस पहल में शामिल हुए हैं। रूस ने विचार करने की बात कही है। भारत को भी आमंत्रण मिला है, लेकिन सरकार ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है।
ट्रंप ने कहा कि शांति परिषद केवल गाजा में सामान्य स्थिति बहाल करने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि अन्य अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर भी ध्यान देगी। उन्होंने इसे अब तक की सबसे प्रभावशाली विश्व संस्था बताया और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करेगी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह परिषद संयुक्त राष्ट्र का विकल्प नहीं है, हालांकि विशेषज्ञ इसे यूएन सुरक्षा परिषद के प्रभाव को कम करने वाला मान रहे हैं।
सदस्यता और निधि
देशों को तीन वर्ष के लिए अस्थायी सदस्यता मिलेगी। जो देश एक अरब डॉलर का योगदान देंगे, उन्हें स्थायी सदस्यता मिलेगी। यह स्पष्ट नहीं है कि यह राशि कुल होगी या वार्षिक। जमा की गई राशि गाजा के विकास पर खर्च की जाएगी। ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 50 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है, हालांकि अब तक 35 देशों ने औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा की है।
पृष्ठभूमि और कार्यकारी समिति
यह परिषद सितंबर 2025 में गाजा शांति योजना के हिस्से के रूप में शुरू हुई थी। अब इसे विश्व स्तर पर विस्तारित किया गया है ताकि युद्ध और संघर्ष को रोका जा सके। परिषद के प्रमुख अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप हैं, जबकि कार्यकारी समिति में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, जेरेड कुशनर और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा शामिल हैं।
अन्य देशों की प्रतिक्रिया
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वह तभी शामिल होंगे जब अमेरिका में फंसी हुई रूसी संपत्ति में से एक अरब डॉलर जारी किया जाए। चीन ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी संस्था को संयुक्त राष्ट्र के बाहर मान्यता नहीं देगा। फ्रांस ने शामिल होने से मना किया और ब्रिटेन ने कहा कि वह अभी परिषद में शामिल नहीं होगा।



