72 प्रतिशत वोट से सातवीं बार राष्ट्रपति बने मुसेवेनी, विद्रोह कर पहली बार सत्ता में आए थे
युगांडा के राष्ट्रपति चुनाव में एक बार फिर योवेरी मुसेवेनी ने जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 72 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी और पॉप सिंगर से नेता बने बोबी वाइन को 24 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। चुनाव आयोग ने 17 जनवरी को राजधानी कंपाला में नतीजों की घोषणा की।
81 वर्षीय मुसेवेनी की यह सातवीं बार राष्ट्रपति पद पर जीत और लगातार पांचवीं चुनावी जीत है। वे वर्ष 1986 से सत्ता में हैं और उन्होंने पहली बार विद्रोह के जरिए सरकार बनाई थी। बाद में उन्होंने संविधान में दो बार संशोधन कर आयु सीमा और कार्यकाल सीमा समाप्त कर दी, जिससे सत्ता पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई।
हिंसा और धांधली के आरोप
हालांकि मुसेवेनी की जीत पर हिंसा और चुनावी धांधली के गंभीर आरोप भी लगे हैं। बोबी वाइन ने बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाते हुए अपने समर्थकों से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है। चुनाव अभियान के दौरान उनकी रैलियों को कई बार सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और गोलियों से तितर-बितर किया। इनमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई और सैकड़ों समर्थकों को गिरफ्तार किया गया।
इससे पहले 2021 के चुनाव में भी मुसेवेनी ने बोबी वाइन को हराया था, जिसे अमेरिका ने न तो स्वतंत्र और न ही निष्पक्ष बताया था।
घर से भागने को मजबूर हुए बोबी वाइन
बोबी वाइन का असली नाम रॉबर्ट क्यागुलान्यी है। उन्होंने कहा कि उनके घर पर सेना ने छापा मारा, जिसके बाद उन्हें जान बचाकर भागना पड़ा और वे फिलहाल छिपे हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सेना और पुलिस ने उनके घर की बिजली काट दी और सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य अभी भी घर में नजरबंद हैं। इन घटनाओं ने युगांडा में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।