अमृत 2.0 के तहत सभागवार निगरानी शुरू
अमृत 2.0 (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation 2.0) के अंतर्गत सभागवार (Zonal) निगरानी एवं समीक्षा की प्रक्रिया सक्रिय कर दी गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2025-26 के निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करना है।
अमृत 2.0 में सभागवार निगरानी से जुड़ी प्रमुख बातें
अमृत मंथन-2026 (जनवरी 2026)
परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए ‘अमृत मंथन-2026’ जैसी राज्य स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। ये कार्यशालाएं सीधे तौर पर क्षेत्रीय एवं सभागवार परियोजनाओं की निगरानी पर केंद्रित हैं।
परियोजनाओं की स्थिति
अमृत 2.0 के अंतर्गत अब तक ₹1.18 लाख करोड़ से अधिक लागत की 3,516 से अधिक जल आपूर्ति परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इन सभी परियोजनाओं की निगरानी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जा रही है।
जीआईएस आधारित मास्टर प्लान (उप-योजना)
675 वर्ग-II शहरों के लिए जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार करने की उप-योजना के अंतर्गत ओडिशा, राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के शहरों में विकास कार्यों की सभागवार निगरानी की जा रही है।
पेय जल सर्वेक्षण
नगरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और पेय जल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पेय जल सर्वेक्षण के माध्यम से निगरानी की जा रही है।
अमृत मित्र (स्व-सहायता समूह)
महिलाओं को ‘अमृत मित्र’ के रूप में जोड़ते हुए जल मांग प्रबंधन, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा विभिन्न परियोजनाओं की स्थानीय स्तर पर निगरानी कराई जा रही है। यह समुदाय आधारित निगरानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
योजना के लक्ष्य
अमृत 2.0 के अंतर्गत 500 शहरों में सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन का 100% कवरेज तथा सभी वैधानिक नगरों में नल कनेक्शन उपलब्ध कराने के लक्ष्यों की निरंतर निगरानी की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि अमृत 2.0 मिशन की शुरुआत 1 अक्टूबर 2021 को हुई थी और यह 2025-26 तक प्रभावी रहेगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य शहरों को जल सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाना है।



