ट्रेड डील से दालें बाहर, 500 अरब डॉलर की खरीद जरूरी नहीं
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बनी सहमति में अमेरिका से दाल आयात करने का कोई जिक्र नहीं है। यह जानकारी व्हाइट हाउस द्वारा 10 फरवरी को देर शाम जारी संशोधित फैक्ट शीट से स्पष्ट हुई।
एक दिन पहले जारी फैक्ट शीट में दाल का जिक्र था, लेकिन नए संस्करण में यह पूरी तरह हटा दिया गया है। पहले व्हाइट हाउस ने यह दावा किया था कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा, लेकिन अब केवल यह कहा गया है कि भारत खरीदने का इरादा रखता है यानी कोई बाध्यता नहीं है।
विपक्ष ने किया था हंगामा
पहले जारी फैक्ट शीट को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला किया था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। ट्रंप प्रशासन ने भाषा को नरम किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वाशिंगटन संवेदनशील मुद्दों पर सतर्कता से समझौते को पेश कर रहा है।
संवेदनशील कृषि उत्पादों का संशोधन
पहले के ब्यौरे में 'कुछ दालों' का उल्लेख था, जो संशोधित फैक्ट शीट में पूरी तरह हटा दिया गया। इससे ठीक एक दिन पहले भारत सरकार ने कहा था कि कृषि और किसानों के लिए संवेदनशील किसी भी अनाज का आयात नहीं खोला जा रहा है। दालें भारत में संवेदनशील कृषि उत्पाद हैं और टैरिफ में बदलाव घरेलू बाजार को प्रभावित कर सकता था।
500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद
संशोधन में यह स्पष्ट किया गया कि भारत ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, कोयला आदि अमेरिकी उत्पादों की खरीद करने का इरादा रखता है, लेकिन कोई बाध्यता नहीं है। यह ट्रंप प्रशासन के लचीले रुख को दर्शाता है।
डिजिटल सेवाओं पर टैक्स और द्विपक्षीय बातचीत
पहले कहा गया था कि भारत अपना डिजिटल सर्विसेज टैक्स हटा देगा। संशोधित संस्करण में यह दावा हटा दिया गया है और अब केवल कहा गया है कि दोनों देश डिजिटल व्यापार नियमों पर मजबूत द्विपक्षीय बातचीत करेंगे, जिसमें भेदभावपूर्ण प्रथाओं और बाधाओं को दूर करने पर जोर होगा।
मोदी-ट्रंप वार्ता के अनुरूप
ये संशोधन पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई वार्ता के चार दिनों बाद जारी मूल संयुक्त बयान से अधिक मेल खाते हैं। पहले जारी फैक्ट शीट से भारत सरकार असहज थी।