मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना में एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब लाभार्थियों को घर बनाने के लिए पैसे तीन किस्तों में मिलेंगे। हर किस्त ₹40,000 की होगी, यानी कुल ₹1,20,000। पहली किस्त हाउसिंग प्रोजेक्ट अप्रूव होते ही जारी कर दी जाएगी। इसके अलावा जॉब कार्ड धारकों की मज़दूरी घर बनाने के फंड से अलग दी जाएगी। यह नई व्यवस्था घर बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगी और यह पक्का करेगी कि ज़रूरतमंदों को समय पर मदद मिले।
इस नए सिस्टम के तहत, भुगतान की प्रक्रिया को आसान और ज़्यादा ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए इसे तीन बराबर किस्तों में बांटा गया है। लाभार्थियों को ₹40,000 की तीन किस्तें मिलेंगी। पहली किस्त हाउसिंग प्रोजेक्ट को आधिकारिक तौर पर मंज़ूरी मिलते ही लाभार्थी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाएगी, जिससे वे कंस्ट्रक्शन की नींव रख सकें। अगली दो किस्तें कंस्ट्रक्शन के काम की प्रोग्रेस के आधार पर जारी की जाएंगी।
जॉब कार्ड मजदूरी का पैसा अलग: इस स्कीम का सबसे ज़रूरी पहलू यह है कि घर बनाने के लिए दिए जाने वाले ₹1.20 लाख के अलावा, लाभार्थियों को उनके जॉब कार्ड के आधार पर अलग से मज़दूरी का पैसा भी मिलेगा, जिससे गरीब परिवारों पर वित्तीय बोझ कम होगा। उम्मीद है कि इस बदलाव से निर्माण कार्य में तेज़ी आएगी, क्योंकि अब फंड का वितरण चरणबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि इस प्रक्रिया के ज़रिए सच में ज़रूरतमंद लोगों को बिना किसी रुकावट के उनके पक्के घर मिलें।
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी शुरुआत 25 जून 2015 को की गई थी। इस योजना का मकसद 2024-25 तक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), कम आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को पक्के घर देना है। यह योजना किफायती घरों के निर्माण को बढ़ावा देती है और होम लोन पर ब्याज सब्सिडी (CLSS) और ज़रूरी बुनियादी सुविधाएं भी देती है।